एक जमाने में देश में केवल रोडस्टर (काले) साइकिल का ही बोलबाला था लेकिन बदलते लाइफ स्टाइल में जहां हर चीज पर फैशन का रंग चढ़ रहा है, साइकिल भी इससे अछूती नहीं रही। हालत यह है कि आज मॉडर्न एवं फैंसी साइकिल ने देश के पचास फीसदी बाजार पर कब्जा जमा लिया है।
फैंसी के बाद अब हाई-एंड साइकिल चलन में है। नतीजतन बाजार में बीस हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की साइकिलें लोगों को लुभा रही हैं, फिलहाल हाई-एंड साइकिल के अधिकतर पुर्जों का विदेशों से आयात कर उनको एसेंबल किया जा रहा है।
देश की तमाम दिग्गज कंपनियां अब लग्जरी एवं हाई-एंड साइकिलों की मार्केटिंग में लगी हुई हैं। मॉडर्न साइकिल में मल्टीगियर साइकिल ने अपनी अलग पहचान बना ली है। हालांकि इंडियन बाईसाइकिल मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सतीश ढांडा कहते हैं कि देश की जरूरतों को देखते हुए यहां पर बेसिक रोडस्टर साइकिल की भी मांग लगातार बनी रहेगी।
रोडस्टर साइकिल का बाजार लगभग स्थिर है, मॉडर्न साइकिल के बाजार में दस से पंद्रह फीसदी की ग्रोथ लगातार बनी हुई है। इस ग्रोथ की सारी भरपाई मॉडर्न, फैंसी एवं ट्रेंडी साइकिलों के जरिये हो रही है। ढांडा का तर्क है कि मैदानी इलाकों में तीन से पांच गियर के हल्के, सुरक्षित, स्टाइलिश साइकिल के बाजार को भी बढ़ाना होगा।
हीरो इको ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर गौरव मुंजाल का कहना है कि इस वक्त उद्योग का फोकस क्वालिटी और आरामदायक पर अधिक है। मल्टीगियर साइकिल का बाजार तेजी से बढ़ रहा है इसलिए अधिकतर कंपनियां इसी पर फोकस कर रही हैं। मुंजाल ने कहा कि इसके अलावा एल्यूमिनियम से बने हाई-एंड साइकिल की भी मांग बढ़ रही है।
साइकिल बाजार का ट्रेंड
भारत में ज्यादा मांग बेसिक रोडस्टर (काले) साइकिल की रही है लेकिन अब लाइफस्टाइल के दौर में मॉडर्न साइकिलों की मांग जोर पकड़ने लगी है। वर्ष 2001 में बाजार में फैंसी साइकिल की हिस्सेदारी करीब पांच से दस फीसदी थी जोकि अब पचास फीसदी तक पहुंच गई है।
देश में 2001 में एक करोड़ साइकिल का बाजार था, अब यह बढ़कर पौने दो करोड़ साइकिल सालाना पर पहुंच गया है। देश में तकरीबन डेढ़ करोड़ साइकिलों का उत्पादन किया जा रहा है जबकि बाकी मांग की भरपाई विदेशों से आयात के जरिये की जा रही है।
दुनिया के प्रमुख साइकिल बाजार
हॉलैंड में 97 फीसदी आबादी साइकिल चलाती हैं, जबकि जर्मनी में 95 फीसदी, चीन में 35 फीसदी और भारत में केवल 12 फीसदी लोग साइकिल चलाते हैं।
मल्टी स्पीड गियर सिस्टम
बाजार में 18, 21 और 24 गियर के मल्टीगियर स्पीड सिस्टम साइकिलों में फिट किए जा रहे हैं। 24 स्पीड गियर साइकिल में आठ स्पीड फ्री व्हील और तीन स्पीड चेन व्हील होते हैं जबकि 18 स्पीड में छह स्पीड एवं 21 गियर में सात स्पीड फ्री व्हील होते हैं। इनका आयात चीन, जापान व सिंगापुर से किया जा रहा है।
चीन के मल्टीगियर सिस्टम की कीमत सात डॉलर के आसपास है। भारत में 15 से 16 डॉलर और जापान के मल्टीगियर सिस्टम की कीमत 20 डॉलर से लेकर 180 डॉलर तक है। जापान (शिमानो) के हाई-एंड मल्टीगियर सिस्टम में सेंसर लगे हैं। साइकिल के ऊंचाई पर पहुंचने पर इस सिस्टम के तहत गियर ऑटोमेटिक तरीके से बदलते हैं।
खास बातें
- भारत में करीब चालीस फीसदी आबादी 21 साल की उम्र से नीचे हैं, बावजूद इसके सभी युवाओं के पास साइकिल नहीं है। इसलिए देश में साइकिल उद्योग का भविष्य अच्छा है।
- देश में केंद्र एवं राज्य सरकार चार, छह, आठ एवं दसमार्गीय हाईवे, एक्सप्रेस हाईवे का निर्माण कराने में लगी हैं लेकिन साइकिल पाथ बनाने की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
- विदेशों में लोग अच्छी सेहत व पर्यावरण संरक्षण के लिए ज्यादातर साइकिल का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि भारत में यह गरीब की सवारी के तौर पर पहचान बनाए हुए है लेकिन अब मॉडर्न साइकिलों के आने से ट्रेंड बदल रहा है।