अमेरिका और यूरोप के वित्तीय हालात में सुधार का सकारात्मक असर देश से होने वाले निर्यात पर दिखाई दे रहा है। फरवरी में निर्यात के आंकड़े में लगातार दूसरे माह बढ़ोतरी देखने को मिली, जब निर्यात 4.25 फीसदी की बढ़त के साथ 26.26 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।
इस अवधि में आयात भी2.6 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 41.1 अरब डॉलर पहुंचने से देश का व्यापार घाटा 14.92 अरब डॉलर पर रहा। आयात की अपेक्षा निर्यात में बेहतर बढ़ोतरी से देश के व्यापार घाटे का दायरा भी कुछ सिमटा है, जोकि सरकार के लिए चालू खाते के घाटे को कम करने में मददगार साबित होगा।
वाणिज्य सचिव एसआर राव ने बताया कि यूरोप की स्थिति में कुछ सुधार के संकेत मिल रहें हैं, जिससे यूरोपीय देशों को होने वाले निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। फरवरी में जिन वस्तुओं के निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई है उनमें इंजीनियरिंग उत्पाद, रिफाइंड तेल, खल, वस्त्र, चावल, दवा और रसायन शामिल हैं।
हालांकि सालाना प्रदर्शन देखा जाए, तो चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से फरवरी तक 11 महीने की अवधि में देश का निर्यात पिछले वित्त वर्ष की आलोच्य अवधि की तुलना में चार प्रतिशत घटकर 265.95 अरब डॉलर रहा है। इस अवधि में आयात 0.25 फीसदी की मामूली वृद्धि के साथ 448 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जिससे व्यापार घाटा 200 अरब डॉलर के स्तर की ओर बढ़ते हुए 182.1 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है।
आयात-निर्यात की मौजूदा स्थिति को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि निर्यातकों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) में कुछ उपायों की घोषणा कर सकती है।
नेशनल कमेटी ऑन एक्सपोर्ट-इंपोर्ट के चेयरमैन संजय बुधिया का कहना है कि निर्यात में हुई बढ़ोतरी देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छी बात है। हमें खुशी है कि निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा कि अब हमें सरकार की विदेश व्यापार नीति का इंतजार है व अपेक्षा है कि इसमें सेज के नियमों में छूट, कर्ज और ट्रांजेक्शन की लागत में कमी के कदमों के साथ-साथ निर्यातकों को कुछ वित्तीय सहूलियतें सरकार की ओर से दी जाएंगी, ताकि निर्यात में और तेजी लाई जा सके। ऐसे कदम दुनिया में अच्छी संभावनाओं वाले बाजारों में व्यापार बढ़ाने में मददगार साबित होंगे।