भविष्य निधि खाते में जमा रकम के लिए दावा करने वाले देश में करीब 30 लाख लोगों का आवेदन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पिछले 11 माह में खारिज कर दिया है। इस दौरान किए गए कुल आवेदन में से तकरीबन 25 फीसदी दावों को ईपीएफओ नहीं निपटा सका है। खुद संगठन ने इस तथ्य को आंकड़ों के जरिए उजागर किया है।
संगठन के आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल 2012 से 4 फरवरी 2013 के बीच देश के 120 क्षेत्रीय कार्यालयों में भविष्य निधि से रकम निकालने के लिए कुल 1 करोड़ 27 लाख 78 हजार 79 आवेदन किए गए। लेकिन, इसमें से 29,37,450 आवेदनों को खारिज कर दिया गया। संगठन ने आवेदन खारिज करने के पीछे तमाम कारण गिनाए हैं। संगठन का कहना है कि जानकारी के अभाव में कई आवेदन ठीक से भरे नहीं गए हैं। जबकि कई आवेदन संदेहास्पद भी हैं। कंप्यूटर ऐसे आवेदनों को खारिज कर रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ईपीएफओ के पास कई ऐसे पुराने खाते हैं, जिसमें नॉमिनी का जिक्र नहीं है। लेकिन इन खातों से रकम निकालने के लिए आवेदन किया जा रहा है। कई पीएफ खातों पर सालों बाद दावेदारी की जा रही है। लेकिन दावा के लिए आवेदनकर्ता खुद को प्रमाणित नहीं कर सका हैं। इन कारणों से भी ईपीएफओ को दावा खारिज करना पड़ा है। अधिकारी ने कहा कि यह समस्या संगठन के लिए चुनौती बनती जा रही है। नए वित्तीय वर्ष में इससे निपटने के लिए कुछ नए उपाए पेश किए जाएंगे।
गौरतलब है कि पिछले 11 माह में दिल्ली व उत्तराखंड के संयुक्त रूप से सर्वाधिक 2,88,798 दावों को खारिज किया गया है। जबकि हरियाणा व राजस्थान के 2,57,509, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के 1,04,127 और उत्तर प्रदेश और बिहार के 1,28,614 दावों को नहीं निपटाया जा सका है।