कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) वर्ष 2012-13 में अपने अंशधारकों को पिछले वित्त वर्ष के 8.25 फीसदी की जगह 8.6 फीसदी ब्याज दे सकता है। इससे ईपीएफओ के 5 करोड़ अंशधारों को लाभ पहुंचेगा।
सूत्रों के अनुसार ईपीएफओ ने 8.6 फीसदी की दर से ब्याज देने का खाका गहन विचार विमर्श के बाद तैयार कर लिया है। इससे संगठन को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने वर्ष 2010-11 में 9.5 फीसदी ब्याज दिया था, लेकिन वर्ष 2011-12 में इसे घटाकर 8.25 फीसदी कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार संगठन के निष्क्रिय खातों में 22,000 करोड़ की राशि पड़ी हुई है। गौरतलब है कि उन खातों को निष्क्रिय माना जाता है जिनमें 36 महीने से पैसे जमा न हुए हों। पिछले साल संगठन ने ऐसे खातों में ब्याज की राशि नहीं जोड़ने का फैसला किया था। अगर ऐसा किया जाता है तो संगठन 9 फीसदी तक ब्याज देने में सक्षम हो सकता है।
आमतौर पर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन साल के आरंभ में ब्याज दर की घोषणा करता है, लेकिन मौजूदा वित्त वर्ष के लिए ब्याज दर की घोषणा में हो रही देरी को देखते हुए कर्मचारी संगठन केंद्रीय न्यासी मंडल (सीबीटी) की बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं। सीबीटी ईपीएफओ की सर्वोच्च नीति निर्धारक निकाय है।