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पीएम मोदी के सामने बड़ी चुनौती, कैसे लाएंगे बिजली?

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जापान दौरे के शोर-शराबे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट के लिए कड़वी हकीकत का सामना करने का समय है। मोदी और उनकी सरकार को अब मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि देश कोयले और बिजली के भारी संकट से गुजर रहा है।
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देश भर के थर्मल पावर स्टेशनों को कोयले की सप्लाई एक बेहद नाजुक दौर में पहुंच चुकी है देश भर में बिजली संकट है और इस हालात को मोदी सरकार और उनकी नीति-निर्माता भांप नहीं पाए।

पश्चिमी और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में कुछ कंपनियों ने अपने बिजली स्टेशनों और बिजली उत्पादन को जानबूझ कर बंद कर दिया है।

दरअसल इंडोनेशिया से महंगे कोयले के आयात के बाद दाम बढ़ाने के खिलाफ राज्य सरकारों को सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिल गया है। इसके बाद ही इन कंपनियों ने यह कदम उठाया।
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5000 मेगावाट बिजली की कमी

सरकार ऐसी कंपनियों की नकेल कसने में नाकाम रही है। वह महाराष्ट्र जैसे पश्चिमी राज्यों के बिजली उत्पादन संयंत्रों में कोयले की नियमित सप्लाई में नाकाम रही है।

इनमें से एक कंपनी के मालिक से मोदी सरकार की नजदीकी बताई जा रही है और वह इस तरह की गलती कर बचने में कामयाब रहे हैं।

सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी जिन 100 बिजली संयंत्रों की निगरानी करता है उनमें से 29 के पास चार दिन से भी कम का कोयला है।

उत्तरी क्षेत्र में पहले ही 5000 मेगावाट की बिजली की कमी चल रही है क्योंकि कंपनियां ज्यादा बिजली नहीं बना पा रही हैं। पब्लिक और प्राइवेट, दोनों सेक्टर के थर्मल पावर स्टेशन 2012 के बाद का सबसे बड़ा कोयला संकट झेल रहे हैं।
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54,000 मेगावाट बिजली का नहीं हो पा रहा उत्पादन

कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने जुलाई में कोल इंडिया लिमिटेड को खदानों में पड़े तीन करोड़ नब्बे लाख टन कोयले का स्टॉक निकालने को कहा था लेकिन यह नहीं हो सका।

स्थिति और खराब हो सकती है क्योंकि सीआईएल की पांच ट्रेड यूनियनें इंटक, सीटू, एटक, बीएमएस और एचएमएस ने अपनी मांगों के समर्थन में 18 से 20 सितंबर तक  काम धीमा करने की चेतावनी दी है।

बुधवार को देश के बिजली उत्पादन का पांचवां हिस्सा ठप पड़ा था। 3 सितंबर को कुल 2,50,257 मेगावाट उत्पादन क्षमता में 54,000 मेगावाट की बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा था।

यह सिलसिला पिछले कई महीनों से जारी है जबकि देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से बुरी तरह बिजली संकट से जूझ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कोल इंडिया लिमिटेड के पास तीन करोड़ टन के करीब कोयला रेलवे की साइटों और अन्य जगहों पर पड़ा है।

कोल इंडिया ने अपनी सब्सिडियरी से इस कोयले को उठाने को कहा है ताकि क्रिटिकल और सुपर क्रिटिकल पावर स्टेशनों को कोयले की सप्लाई निर्बाध तौर पर मिलती रहे।
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