संयुक्त अरब अमीरात की ऐतिहाद एयरलाइंस के जेट एयरवेज में हिस्सेदारी खरीद का सौदा आगे बढ़ता दिख रहा है। दोनों कंपनियों के बीच अगले सप्ताह तक सहमति बन सकती है। बृहस्पतिवार को जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल और ऐतिहाद एयरलाइंस सीईओ जेम्स होगन ने नागर विमानन मंत्री अजित सिंह और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा से मुलाकात कर इस प्रस्तावित निवेश की जानकारी दी।
दोनों मंत्रियों ने इस सौदे को लेकर काफी सकारात्मक रुख जाहिर किया है, लेकिन माना जा रहा है कि सरकार की ओर से असल हरी झंडी वित्त मंत्री पी चिदंबरम ही देंगे। शुक्रवार को दोनों कंपनियों के प्रमुख अधिकारी वित्त मंत्री से भी मिल सकते हैं। हालांकि, जेट में करीब 33 करोड़ डॉलर के इस एफडीआई निवेश को लेकर एयर इंडिया ने अपने शंका जाहिर की थी, लेकिन नागर विमानन मंत्री अजित सिंह को इस सौदे से कोई दिक्कत नहीं है।
उनका कहना है कि सरकार की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि जो भी सौदा हो वह नियमों के दायरे में हो। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने भी ऐतिहाद को भरोसा दिलाया है कि एविएशन क्षेत्र में एफडीआई नीति के तहत आने वाले किसी भी निवेश का स्वागत किया जाएगा।
जेट के शेयर में उछाल
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की एतिहाद एयरवेज द्वारा जेट एयरवेज में हिस्सेदारी खरीदने के सौदे की खबर के चलते जेट के शेयरों में उछाल देखने को मिला। कारोबार के दौरान पांच फीसदी तक ऊपर उछलने के बाद बीएसई में जेट के शेयर 4.34 फीसदी की बढ़त के साथ 622.10 रुपये के भाव पर बंद हुए। दूसरी ओर एनएसई में यह 5.13 फीसदी की तेजी पर 625.30 रुपये के भाव पर बंद हुए।
क्यों हिस्सेदारी बेच रही है जेट
जेट एयरवेज को करीब दो अरब डॉलर (करीब 10 हजार करोड़ रुपये) के कर्ज से उबरने के लिए निवेश की जरूरत है। ऐतिहाद के जरिए जेट को अपने नेटवर्क का विस्तार करने में भी मदद मिलेगी। फिलहाल जेट में विदेशी हिस्सेदारी करीब 80 फीसदी है।
एफआईपीबी के नियमों के अनुसार विदेशी हिस्सेदारी को घटाकर 49 फीसदी के अंदर करना जरूरी है। जेट में हिस्सेदारी खरीदना ऐतिहाद के लिए भी फायदे का सौदा साबित हो सकता है। भारत से बड़ी तादाद में लोग खाड़ी देशों की हवाई यात्रा करते हैं जिस पर ऐतिहाद की नजर है।