वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था 5.6 फीसदी की दर से बढ़ेगी, फिर भी रिजर्व बैंक द्वारा इस साल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं है। फिक्की के इकोनामिक आउटलुक सर्वे में यह जानकारी सामने आई है।
सर्वे के मुताबिक नई सरकार ने अपने कामकाज के दौरान ग्रोथ और गवर्नेंस को तरजीह देने के मद्देनजर नीतिगत स्तर पर कई सकारात्मक संकेत दिए हैं। इससे निवेशकों में धीरे-धीरे भरोसा लौट रहा है और उम्मीद है कि कार्यान्वयन के प्रभावी होने के साथ-साथ इसे और मजबूती मिलेगी।
सर्वे में भाग लेने वाले अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि रिजर्व बैंक अगले साल की पहली तिमाही में ब्याज दरों में कटौती पर विचार करेगा। मुद्रास्फीतिक दबाव कम होने के ठोस संकेत मिलने तक रिजर्व बैंक ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति बनाए रखेगा। चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई 7.8 फीसदी रहने की उम्मीद है।
फिक्की सर्वे के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी की वृद्धि दर न्यूनतम 5.3 फीसदी और अधिकतम 6.0 फीसदी रह सकती है। इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि आशावादी रुख फिर से तैयार हो रहा है और चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भी अर्थव्यवस्था की गतिविधियां इसी रफ्तार से बनी रहेंगी। कमजोर मानसून के बावजूद कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर स्थिर बनी रह सकती है। औद्योगिक सेक्टर की स्थिति धीरे-धीरे बेहतर होने का पूर्वानुमान है।