देश में बढ़ते ई-कॉमर्स में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने की चाहत लिए हैंडीक्राफ्ट निर्यातक घरेलू बाजार में कारोबारी संभावनाओं का दोहन करने के लिए बड़े पोर्टलों के साथ हाथ मिला रहे हैं।
एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्टस (इपीसीएच) के वाइस चेयरमैन राजेश कुमार जैन ने बताया कि भारत में हैंडीक्राफ्ट उत्पादों की बड़े पैमाने पर मांग है और ई- कॉमर्स पोर्टल इन उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए बेहतर माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, घरेलू बाजार निर्यातकों के लिए बड़े पैमाने पर अवसर उपलब्ध करा रहा है।
उन्होंने कहा कि फ्लिपकार्ट और स्नैपडील अच्छे प्लेटफार्म हैं, जहां हम भारत में अपने उत्पाद बेच सकते हैं। भारत का हैंडीक्राफ्ट निर्यात जनवरी में सालाना आधार पर 10 फीसदी गिर कर 12 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया है। मौजूदा समय में भारत चीन के साथ एशिया पैसिफिक बाजार में सबसे तेजी से बढ़ने वाला ई-कॉमर्स बाजार है।
इंटरनेट का प्रसार बढ़ने, यूजर्स द्वारा बड़ी संख्या में स्मार्टफोन अपनाने और डेटा की दरों में कमी ने भारत में खरीदारी के तौर तरीके को बड़े पैमाने पर बदल दिया है। इसके अलावा बड़ी आबादी और इंटरनेट यूजर के बढ़ते आधार ने भी ई कॉमर्स की ग्रोथ बढ़ाने में मदद की है। अनुमान के मुताबिक भारत में ई कॉमर्स सेक्टर का बाजार सालाना लगभग 5 अरब डॉलर का है। जैन का कहना है कि हैंडीक्राफ्ट सेक्टर में बड़े पैमाने पर श्रम की जरूरत होती है। ऐसे में ऑनलाइन प्लेटफार्म नौकरियों के अवसर पैदा करने में भी मदद करेंगे।
इन प्लेटफार्मों पर हाउस वेयर, होम टेक्सटाइल, फर्नीचर, ग्लासवेयर, बांस से बनी वस्तुएं, फैशन ज्वेलरी और लैंप एंड लाइटिंग कैटेगरी की वस्तुएं इन प्लेटफार्मो पर बेची जा सकती हैँ। विश्लेषकों का कहना है कि भारत में ऑनलाइन खरीदारी का तेजी से विस्तार हो रहा है और विस्तार की प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है।
आगामी बजट से काउंसिल की उम्मीदों के बारे में जैन ने कहा कि सरकार को हैँडीक्राफ्ट सेक्टर की ग्रोथ को घरेलू और वैश्विक बाजारों में भी बढ़ाने के लिए कई कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि हम वैश्विक बाजार मं अपनी हिस्सेदारी दोगुना करने के लक्ष्य पर काम रहे हैं। मौजूदा समय में वैश्विक बाजार में हमारी हिस्सेदारी 3 फीसदी है और इसे दोगुना करने के लिए हमें कौशल विकास की मदद लेने के साथ उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर करना होगी अैर नए बाजार खोजने होंगे।