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गंभीर बिजली संकट की आशंका, सरकार सतर्क

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केंद्र सरकार ने खराब मानसून और सूखे की आशंका को देखते हुए उत्तरी क्षेत्र के बिजली संकट से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। बारिश कम होने से यूपी, पंजाब समेत पूरे उत्तरी भारत में पनबिजली उत्पादन में कमी की आशंका है।
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लिहाजा किसानों और आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार अतिरिक्त बिजली सप्लाई के इंतजाम में लगी है। इसके तहत उत्तरी क्षेत्र को 4194 मिलियन यूनिट अतिरिक्त बिजली मुहैया कराई जाएगी।

मानसून की कमी से बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश और पंजाब पर पड़ेगा। इस अतिरिक्त बिजली से पनबिजली उत्पादन में कमी की भरपाई हो जाएगी।

बिजली की उपलब्धता में जुटी सरकार

बिजली मंत्रालय के आला सूत्रों के मुताबिक ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने अधिकारियों को विभिन्न स्रोतों से बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने की कोशिश करने के निर्देश दिए हैं।

इनमें गैस से पैदा बिजली भी जल्द से जल्द मुहैया कराने का इंतजाम शामिल है। इस योजना के तहत क्षेत्र की थर्मल पावर यूनिटों की मरम्मत को टालने, गैस आधारित बिजली उत्पादन स्टेशनों को बढ़ाने, विंध्याचल एसटीपीएस (स्टेज-4) की 500 मेगावाट वाली यूनिट के साथ तालमेल बिठाने और बिजली उत्पादन स्टेशनों की बेकार पड़ी क्षमता का इस्तेमाल शामिल है।

ऊर्जा मंत्रालय में ऑपरेशन को-ऑर्डिनेशन कमेटी (ओसीसी) ने 11 जुलाई को क्षेत्र की योजना का खाका खींचने के लिए एक बैठक बुलाई थी। ओसीसी नॉर्दर्न रीजनल पावर कमेटी यानी एनआरपीसी की उप-कमेटी है।

इसमें कहा गया कि उत्तरी क्षेत्र में गैस आधारित बिजली संयंत्रों में क्षमता विस्तार से सितंबर तक 1017 मिलियन यूनिट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन होगा। भले ही उत्तरी क्षेत्र में बिजली संकट से निपटने की तैयारी चल रही हो, लेकिन बिजली की उपलब्धता मांग से कम रहेगी।

2,000 मेगावाट बिजली की है कमी

अगस्त, 2014 में क्षेत्र में 1,792 मेगावाट बिजली की कमी रहेगी। सबसे ज्यादा असर यूपी पर पड़ेगा, जहां 2000 मेगावाट बिजली की कमी रहेगी।

पंजाब में 558 मेगावाट बिजली की कमी होगी। यहां 10,050 मेगावाट मांग पैदा होने की उम्मीद है। सरकार ने आपस में जुड़े पावर सिस्टम में लो फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ओसिलेशन की समस्या से निपटने के लिए उत्तरी क्षेत्र में इसे स्थिर करने वाले उपकरणों का ऑडिट होगा।

उत्तरी क्षेत्र में बिजली की कमी की वजह से मांग में उतार-चढ़ाव के मद्देनजर एनआरपीसी थर्मल यूनिटों में दो शिफ्ट में परिचालन की हिमायत कर रही है। कमेटी ने इसकी जरूरत बताते हुए कहा कि इससे मांग में अचानक कमी से निपटने में मदद मिलेगी और पीक और गैर पीक आवर की मांग का अंतर कम हो सकेगा।

कमेटी का कहना है कि इससे उत्तरी क्षेत्र में आम तौर पर तूफान की वजह से लोड क्रैश की समस्या के दौरान कम समय में ही यूनिट को दोबारा चालू किया जा सकेगा। जिन यूनिटों में एक शिफ्ट में परिचालन होता है, उनमें यूनिट बंद होने के बाद दोबारा शुरू होने में ज्यादा समय लगता है।
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क्या है तैयारी

बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने अधिकारियों को विभिन्न स्रोतों से बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने की कोशिश करने के निर्देश दिए हैं। इनमें गैस से पैदा बिजली भी जल्द से जल्द मुहैया कराने का इंतजाम भी शामिल है। बिजली मंत्रालय में ऑपरेशन को-ऑर्डिनेशन कमेटी (ओसीसी) ने 11 जुलाई को क्षेत्र की योजना का खाका खींचने के लिए एक बैठक बुलाई थी।

कहां कितना संकट
उत्तरी क्षेत्र में अगस्त, 2014 में 1,792 मेगावाट बिजली की कमी रहेगी। सबसे ज्यादा असर यूपी पर पड़ेगा, जहां 2000 मेगावाट बिजली की कमी  रहेगी। पंजाब में 558 मेगावाट बिजली की कमी होगी। यहां 10,050 मेगावाट मांग पैदा होने की उम्मीद है।

तकनीकी इंतजाम
बिजली की कमी की वजह से मांग में उतार-चढ़ाव के मद्देनजर एनआरपीसी थर्मल यूनिटों में दो शिफ्टों में परिचालन की हिमायत कर रही है। कमेटी ने इसकी जरूरत बताते हुए कहा कि इससे मांग में अचानक कमी से निपटने में मदद मिलेगी और पीक और गैर पीक आवर की मांग का अंतर कम हो सकेगा।
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