आम बजट से पूर्व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने स्वास्थ्य मंत्रालय को कुछ अहम सुझाव भेजे हैं। इसमें बताया गया है कि कैसे गांवों और सुदूर इलाकों तक चिकित्सकों को पहुंचाया जा सकता है। आईएमए ने जिला स्तर के अस्पतालों को भी गुलजार और उन्नत बनाने के लिए सुझाव दिए हैं।
आईएमए की ओर से कहा गया है कि 60 प्रतिशत से अधिक चिकित्सक शहरी क्षेत्र में कार्यरत हैं। अस्पतालों में जितने बिस्तर उपलब्ध हैं, उनमें से करीब 84 प्रतिशत बेड शहरी इलाकों के अस्पतालों में हैं जबकि शहरी इलाकों में आज भी देश की 20 फीसदी आबादी ही रहती है।
आईएमए के महासचिव डॉक्टर नरेंद्र सैनी ने बताया कि जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित किया जाना चाहिए। वहां जब डॉक्टरी की पढ़ाई होने लगेगी तब वहां से तैयार होने वाले डॉक्टर उन इलाकों में इलाज भी करेंगे। जिला अस्पताल में उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने से ग्रामीण इलाकों में चिकित्सकों की समस्या खत्म हो सकती है।
देश में 15 लाख चिकित्सक हैं जिसमें डेढ़ लाख ही सरकारी अस्पतालों में कार्यरत हैं। 75 से 80 फीसदी लोग ऐसे हैं जो इलाज करवाने में सक्षम नहीं होते। सरकारी अस्पतालों को जो बजट दिया जाता है, उसमें महज 15 प्रतिशत राशि ही दवा की खरीद पर खर्च की जाती है। 70 फीसदी मरीज निजी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों से इलाज कराते हैं इसलिए आम बजट से पहले आईएमए ने सरकार से आग्रह किया है कि स्वास्थ्य पर जीडीपी का तीन प्रतिशत खर्च किया जाना चाहिए।