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नहीं दिख रही ग्रामीण अनाज भंडारण योजना

Fri, 04 Jan 2013 11:37 PM IST
नई दिल्ली/विजय गुप्ता
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फसल का गांवों में ही भंडारण कर सही समय पर किसानों को बाजार मूल्य दिलाने के लिए शुरू की ग्रामीण गोदाम योजना जमीनी स्तर पर नहीं दिख रही है। 12 वर्ष बीत जाने के बावजूद अभी तक किसी भी राज्य में योजना पूरी नहीं हुई है। खासबात यह है कि सर्वाधिक अनाज उत्पादक राज्य पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में ही यह योजना पीछे चल रही है। देश में चल रही कुल ग्रामीण गोदाम योजनाओं में प्रमुख अनाज उत्पादक राज्यों की हिस्सेदारी महज 15 फीसदी के आसपास ही है। जबकि गुजरात में कम क्षमता के बावजूद सर्वाधिक योजनाओं पर काम चल रहा हैं।
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कृषि मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा समय गुजरात में 26.48 लाख टन भंडारण क्षमता वाली लगभग 8,379 योजनाओं पर काम चल रहा है। इसी प्रकार आंध्र प्रदेश में 44.42 लाख टन क्षमता की 1,171 योजनाएं चल रही हैं। कर्नाटक में भी ग्रामीण भंडारण योजना के तहत 21.85 लाख टन क्षमता वाली 3,555 योजनाएं प्रगति पर हैं। पश्चिम बंगाल में 10.48 लाख टन से अधिक क्षमता वाली 2,358 योजनाएं कार्य कर रही हैं।

महाराष्ट्र में भी 38.72 लाख टन भंडारण क्षमता की 2,699 और मध्य प्रदेश में 39.81 लाख टन क्षमता की 2,478 योजनाएं चल रही हैं। छत्तीसगढ़ में 12.90 लाख टन की 442 योजनाएं और बिहार में महज 3.47 लाख टन क्षमता की 889 योजनाएं चल रही हैं। यह सभी योजनाएं पिछले 12 वर्षों से चल रही हैं।
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हालांकि कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री तारिक अनवर का कहना है कि भले ही यह सभी योजनाएं एक दशक से ज्यादा समय से चल रही हैं। लेकिन इन योजनाओं का किसानों को लाभ मिलने लगा है। अब केंद्र सरकार 348.40 लाख टन क्षमता की 29,715 योजनाएं स्वीकृत कर चुकी है। खासबात यह है कि इन योजनाओं में 70 फीसदी गोदाम किसानों के हैं।

अनवर के मुताबिक प्रमुख अनाज उत्पादक राज्यों में योजनाएं भले ही कम हैं। लेकिन इनकी क्षमता अधिक हैं। पंजाब में 39.46 लाख टन, हरियाणा में 40.24 लाख टन और उत्तर प्रदेश में 35.80 लाख टन क्षमता वाली योजनाओं पर काम चल रहा है।
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