जीएमआर इंफ्रास्ट्रक्चर का कहना है कि माले एयरपोर्ट संकट में किसी विदेशी देश की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है। जीएमआर एयरपोर्ट्स के सीएफओ सिद्धार्थ कपूर ने कहा कि कंपनी इसको लेकर सुनिश्चित नहीं है, लेकिन माले संकट में किसी विदेशी देश का हाथ संभव है। क्योंकि, मालदीव में राजनीतिक स्थिति और ढांचे को देखकर इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।
माना जा रहा है कि माले एयरपोर्ट को विकसित और संचालित करने के 50 करोड़ डॉलर के जीएमआर के अनुबंध को रद्द कराने में चीन जैसे देशों का हाथ हो सकता है। इसी से जुड़े एक सवाल के जवाब में कपूर ने माले संकट में किसी विदेशी ताकत का हाथ होने से इनकार नहीं किया है। हालांकि, उन्होंने विदेशी देश की संलिप्तता की संभावनाओं को विस्तार से उजागर नहीं किया।
सिंगापुर हाईकोर्ट ने मालदीव सरकार द्वारा जीएमआर का अनुबंध रद्द करने पर रोक लगाई थी। लेकिन, मालदीव ने कोर्ट के इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया और साफ तौर पर कहा कि वह शुक्रवार तक एयरपोर्ट को अपने कब्जे में ले लेगा। वहीं, जीएमआर ने अनुबंध रद्द करने के लिए मालदीव सरकार की ओर से दिए जा रहा मुआवजा लेने से इनकार कर दिया है। जीएमआर का कहना है कि वह इस देश में एयरपोर्ट का संचालन करने के लिए आई थी, न कि मुआवजा लेने के लिए अनुबंध हासिल किया था।
कंपनी द्वारा अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में याचिका दायर करने की बाबत कपूर ने बताया कि जीएमआर उम्मीद और अनुरोध करती है कि मालदीव सरकार अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करेगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इस संकट में शुरुआत से ही उनका समर्थन किया और उम्मीद है कि वह इसके सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए अपनी तरफ से हर संभव कोशिश करेगी।