बुनियादी क्षेत्र (इंफ्रास्ट्रक्चर) की परियोजनाओं को हर हाल में आगे का बढ़ाने का दावा करने वाली सरकार का भूतल परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) फंड की तंगी से जूझ रहा है।
दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रीयल कारिडोर (डीएमआईसी) से जुड़ी सड़क निर्माण परियोजनाओं को लेकर एमओआरटीएच ने फंड की कमी बताकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं।
हाल ही में एमओआरटीएच सचिव की तरफ से डिपार्टमेंट आफ इंडस्ट्रीयल पालिसी एंड प्रमोशन (डीआईपीपी) के सचिव को लिखे पत्र में कहा गया है कि फंड की कमी की वजह से सड़क से जोड़ने के प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।
अब दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रीयल कारिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ( डीएमआईसीडीसी) को अपनी परियोजनाओं को आगे ले जाने के लिए आगामी बजट का इंतजार है। डीएमआईसीडीसी को उम्मीद है कि नए बजट में रूकी पड़ी परियोजनाओं के लिए वित्त मंत्रालय की तरफ से फंड मुहैया कराया जाएगा।
मामले के मुताबिक डीएमआईसीडीसी ने अपने अंतर्गत बनने वाले शहरों को रेल, सड़क व राजमार्ग से जोड़ने के लिए रेल मंत्रालय व एमओआरटीएच को वर्ष 2011 में पत्र लिखा था।
डीएमआईसीडीसी के मुताबिक एमओआरटीएच ने महाराष्ट्र और राजस्थान में स्थापित होने वाले शहरों को सड़कों से जोड़ने के प्रस्ताव पर अपनी रजामंदी दे दी थी। इस परियोजना को लेकर रेलवे बोर्ड टेक्निकल अध्ययन कराने पर राजी हो गया।
परियोजना को सड़क से जोड़ने के मामले में एमओआरटीएच की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर डीएमआईसीडीसी की तरफ से फिर से एमओआरटीएच को पत्र लिखा गया।
इस पर एमओआरटीएच ने वर्ष 2013 में डीएमआईडीसी को अपने जवाब में कहा कि इस सड़क परियोजना के विकास के लिए वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय को अपने स्तर पर फंड की व्यवस्था करनी होगी। एमओआरटीएच परियोजना के लिए केवल तकनीकी समर्थन दे सकता है।
डीएमआईसीडीसी के मुताबिक हाल ही में एमओआरटीएच ने फिर से डीएमआईसीडीसी को लिखे पत्र में कहा है कि फंड की कमी की वजह से सड़क निर्माण की इस परियोजना को एमओआरटीएच की तरफ से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।
अब डीएमआईसीडीसी को इस मामले में वित्तीय सेवाओं के विभाग (डीईए) से उम्मीद है। सड़क परियोजनाओं के इस मामले पर डीईए एमओआरटीएच से अपने स्तर पर बात करेगा।