देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी का कहना है कि कोयले को लेकर उठे विवाद का उस पर फिलहाल कोई असर नहीं पडे़गा तथा उसकी इस वर्ष बांड और सिंडीकेट लोन के माध्यम से 4000 करोड़ रुपये (75 करोड़ डॉलर) जुटाने की योजना है। एनटीपीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अरूप राय चौधरी ने कहा कि कोयले की आपूर्ति कम होने के चलते अप्रैल से अब तक बिजली उत्पादन में दो अरब यूनिट की कमी हुई है, लेकिन कंपनी ने चालू वर्ष के लिए जरूरत के अनुरूप कोयले की व्यवस्था करीब-करीब सुनिश्चित कर ली है तथा उन्हें विश्वास है कि कोयले को लेकर देश में उठे विवाद का हम पर कोई असर नहीं पडे़गा।
उन्होंने बताया कि कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता में चालू वित्त वर्ष के दौरान 14,038 मेगावाट की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा है, जिसमें से 2,160 मेगावाट अब तक ग्रिड से जोड़ी जा चुकी है। इसे मिलाकर कंपनी को इस वर्ष 16.40 करोड़ टन कोयले की जरूरत होगी, जिसमें से करीब 13.70 करोड़ टन घरेलू कोयला होगा। कंपनी इस वर्ष 1.64 करोड़ टन कोयले का आयात करेगी, जिसमें से 94 लाख टन के लिए ऑर्डर दिए जा चुके हैं तथा 70 लाख टन के लिए जल्द ऑर्डर दे दिए जाएंगे। कंपनी की 9.5 प्रतिशत इक्विटी का विनिवेश करने के सरकार के प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कंपनी सरकार की है और वह इस तरह का कोई फैसला कर सकती है।
उन्होंने कहा कि जहां तक हमारी बात है, तो हमें अपनी तरफ से ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है। हमने रियायती दर पर धन की व्यवस्था कर रखी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कंपनी का बांड के जरिये 75 करोड़ डॉलर बाजार से जुटाने का प्रस्ताव है। यदि बांड के जरिये इतनी धनराशि नहीं जुटा सके, तो 25 करोड़ डॉलर सिंडीकेट लोन के जरिये जुटाए जाएंगे। इसके लिये वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है। उन्होंने कहा कि चालू वर्ष में कंपनी 20,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जबकि 12वीं योजना के दौरान कुल 2,19,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना है।