पहले से ही कमरतोड़ महंगाई का सामना कर रहे लोगों को महंगाई का और बड़ा बोझ ढोने के लिए तैयार हो जाना चाहिए।
दरअसल सरकार ने पेट्रोल के बाद अब डीजल को भी पूरी तरह से नियंत्रणमुक्त कर कीमतें तय करने का अधिकार बाजार को देने की तैयारी पूरी कर ली है।
खुद पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा है कि आगामी छह महीने में डीजल को भी पेट्रोल की तरह नियंत्रणमुक्त कर दिया जाएगा।
डीजल के नियंत्रणमुक्त होने से इसकी कीमतों में इजाफा तय है। इसका असर खेती और ढुलाई क्षेत्र पर पड़ेगा। इस कारण निकट भविष्य में महंगाई के नई ऊंचाइयां छूने के आसार हैं।
मोइली ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये के अवमूल्यन के कारण तेल कंपनियों का घाटा प्रति लीटर डीजल पर 14 रुपए तक पहुंच गया था।
हाल के दिनों में रुपए की सेहत सुधरने के बावजूद वर्तमान में तेल कंपनियों को प्रति लीटर 9.50 रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि हर महीने 50 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर डीजल को नियंत्रण मुक्त करने में और 19 महीने लगते। इसलिए छह महीने में ही डीजल को पूरी तरह से नियंत्रणमुक्त करने का फैसला किया गया।
मोइली ने डीजल के दामों में प्रति महीने 50 पैसे बढ़ोतरी जारी रखने की घोषणा करते हुए यह आश्वासन जरूर दिया कि कीमतों में एकमुश्त तीन से चार रुपए की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।
हालांकि जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में सरकार डीजल को नियंत्रणमुक्त करने जैसे फैसले से बचेगी।
विशेषज्ञ नरेंद्र चंद्रा ने लोकसभा चुनाव की याद दिलाते हुए कहा कि जब सरकार दो साल पहले कैबिनेट के फैसले के बावजूद डीजल को नियंत्रण मुक्त नहीं कर पाई, तब ऐन चुनाव के समय इस आशय का फैसला लिए जाने की संभावना कम है।