इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च का कहना है कि डीजल की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने के केंद्र सरकार के फैसले से देश की वित्तीय स्थिति बेहतर होगी। इससे तेल सब्सिडी में 150 अरब रुपये तक कमी आएगी।
इसके अलावा डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 3.56 रुपये कटौती से महंगाई पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
महंगाई दर पहले से ही गिरावट की ओर है। इससे रिजर्व बैंक को मौद्रिक नीतियों में नरमी लाने का मौका मिलेगा और शीर्ष बैंक नीतिगत दरों में जल्द ही कटौती कर सकेगा। इंडिया रेटिंग ने 1 सितंबर 2014 को जल्द से जल्द डीजल कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने के पक्ष में अपनी राय जाहिर की थी।
जनवरी 2013 के बाद से डीजल की कीमतों में वृद्धि बाधित हुई और हाल में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों की अंडर रिकवरी (घाटा) को ओवर रिकवरी (मुनाफे) में बदल दिया।
तेल कंपनियों की डीजल पर ओवर रिकवरी अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े में 3.56 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई थी। 15 अक्तूबर, 2014 को इंडियन बास्केट के लिए कच्चे तेल की कीमतें गिर कर 83.85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं और डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 61.1 थी।
जब 14 सितंबर 2012 को डीजल की कीमतें लगभग 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाईं गईं तो इंडियन बास्केट के लिए कच्चे तेल की कीमतें 113.64 डॉलर प्रति बैरल थीं और डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 55.47 थी। इससे तेल कंपनियों को डीजल पर 13.86 रुपये प्रति लीटर अंडर रिकवरी का सामना करना पड़ रहा था।
हालांकि रुपया मई-जून 2014 के 59 रुपये प्रति डॉलर की तुलना में कमजोर हो कर अक्तूबर 2014 तक 61.5 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, लेकिन वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट से भारतीय बास्केट की आयात कीमत में बड़े पैमाने पर गिरावट आई है।
अमेरिका द्वारा सेल ऑयल की खोज और यूरोप और एशिया की अर्थव्यवस्थाओं का संघर्ष जारी रहने के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम अवधि में नीचे रहने की उम्मीद है। ऐसे में डीजल की कीमतों को नियंत्रणमुक्त करना सही और मौके पर उठाया गया कदम है।