मोदी सरकार के पहले आम बजट की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे नई सरकार की ओर से आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने वाला बजट पेश किए जाने को लेकर उम्मीदें जोर पकड़ती जा रही हैं। जर्मनी के दाइचे बैंक का कहना है कि उसे उम्मीद है वित्त मंत्री अरुण जेटली लीक से हटकर एक ऐसा बजट पेश करेंगे, जिसका फोकस खपत के बजाय निवेश बढ़ाने पर होगा।
दाइचे बैंक ने अपनी ताजा रिपोर्ट में उम्मीद जताई है कि जेटली का पहला बजट सुखद आश्चर्य देने वाला होगा। यह सरकार की नीतियों को खपत बढ़ाने के बजाय निवेश बढ़ाने की ओर ले जाएगा। बजट में श्रम बहुल विनिर्माण (मैन्यूफेक्चरिंग) और आधारभूत ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) में निवेश को बढ़ावा देकर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर में तेजी लाने पर खासतौर पर जोर दिया जाएगा।
बजट में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सब्सिडी को समन्वित करके गैर कर राजस्व में बढ़ोतरी के उपाय किए जाएंगे। इसके अलावा बजट में निवेश के अनुकूल माहौल बनाकर बचत और निवेश के बीच बढ़ती दूरी को खत्म करने का भी प्रयास किया जाएगा।
बैंक ने डीजल, एलपीजी और केरोसिन की कीमतों में महीनेवार धीमी बढ़ोतरी करके सब्सिडी के बोझ को संतुलित करने जैसे 12 नीतिगत कदम सरकार की ओर से आगामी बजट में उठाए जाने की उम्मीद जताई है। इसमें मनरेगा योजना का फोकस गांवों में सड़कों और सिचांई के विस्तार पर करने की पहल भी की जाएगी। इसके लिए मनरेगा को एक समय सीमा आधारित संशोधित स्वरूप में पेश किया जा सकता है।
इसके अलावा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को उदार बनाने और दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर का काम आगे बढ़ाने की भी उम्मीद इस बजट से है। बजट में सरकार द्वारा 60 हजार से 80 हजार करोड़ के विनिवेश लक्ष्य की घोषणा की उम्मीद भी दाइचे बैंक ने जताई है।