चालू खाते के घाटे और व्यापार घाटे को नियंत्रित करने के लिए सोने के आयात को हतोत्साहित करने के सरकार के उपायों के बावजूद इसकी कीमतों में आई गिरावट और वैवाहिक मांग में तेजी के चलते चालू वर्ष की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में देश में 350 से 400 टन सोने का आयात होगा।
अनुमान विश्व स्वर्ण परिषद (वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में जताया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2013 की दूसरी तिमाही में सोने के आयात में सालाना आधार पर 200 फीसदी का उछाल देखने को मिलेगा और इस तिमाही के दौरान किया जाने वाला स्वर्ण आयात 2012 में पूरे साल के दौरान हुए आयात का करीब आधा होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक चालू वर्ष की पहली तिमाही में भारत में 256 टन सोने का आयात हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में सोने की छड़ों और सिक्कों में निवेश में 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी और यह 97 टन पर पहुंच जाएगा।
दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेतों और कई देशों के केंद्रीय बैंकों द्वाराकठोर मौद्रिक नीति अपनाने की संभावना से ग्लोबल बाजार में इस वर्ष अप्रैल के मध्य में सोने के भाव दो वर्ष के न्यूतनम स्तर 1321.35 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया था।
डब्ल्यूजीसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सोने की मांग में भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशियाई क्षेत्र में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है और अप्रैल-जून तिमाही में इसकी मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। परिषद ने कहा कि वर्ष 2013 में भारत में कुल मिलाकर 865 टन से लेकर 965 टन के बीच सोने के आयात का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार चीन में इस वर्ष अप्रैल में सोने की मांग 160 से 170 टन के आसपास रही और चालू वर्ष में कुल मांग 880 टन के करीब रहने का अनुमान है, जबकि पहले इसके 780 से 880 टन के बीच रहने की संभावना थी।