सरकार द्वारा पिछले कुछ महीनों में आर्थिक सुधार के कई उपाय पेश किये जाने के बावजूद देश के माइक्रो इकोनॉमिक परिदृश्य में लगातार गिरावट आ रही है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) का बिजनेस कान्फिडेंस सूचकांक 50 अंकों से नीचे आ गया है।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि सूचकांक में गिरावट व्यावसायिक माहौल की कमजोरी को दर्शाता है। यह चिंताजनक स्थिति है। मौजूदा स्थिति में नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है। हालांकि सरकार की ओर से हाल के महीनों में किए गए सुधार के उपायों से बेहतर परिणाम आने की संभावना है।
सीआईआई का मानना है कि देश में व्यवसायिक माहौल सुधारने के लिए आगे भी सुधार की प्रक्रिया चालू रहनी चाहिए। सीआईआई के सर्वे में ज्यादातर लोगों ने यह प्रतिक्रिया दी है कि घरेलू आर्थिक विकास, उच्च ब्याज दर, ढांचागत और संस्थागत मामले फिलहाल प्रमुख चिंता का कारण बने हुए हैं।
सर्वे में शामिल 38.9 फीसदी ने माना है कि सरकार के जरिए किये गए सुधार के उपायों का निवेश पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा इसलिए ज्यादातर कंपनियों ने माना है कि चालू वित्त वर्ष में विकास दर 5.5 से छह फीसदी के बीच रहने की संभावना है।
सर्वे में यह भी कहा गया है कि मौजूदा वित्त वर्ष के शेष महीनों में महंगाई और राजकोषीय घाटे का ट्रेंड जारी रह सकता है।