उद्योग संगठन फिक्की ने देश में कर संग्रह बढ़ाने और काले धन की समस्या से निपटने को लेकर केंद्र सरकार को अपने एक अध्ययन के आधार पर कुछ सुझाव दिए हैं।
वाइडनिंग ऑफ टैक्स बेस एंड टैकलिंग ब्लैक मनी शीर्षक से तैयार इस रिपोर्ट में भारत में काले धन की उत्पत्ति के मूल कारणों और उन सेक्टरों की पहचान की गई है, जिनमें काला धन काफी प्रचलित है। इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था में काले धन की उत्पत्ति, जमाव और इस्तेमाल को उजागर करने के लिए सुझाव दिए गए हैं। इस अध्ययन की एक प्रति राजस्व सचिव और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को सौंपी जा चुकी है।
रिपोर्ट के मुताबिक डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और दूसरे बैंकिंग साधनों के जरिए लेन-देन को बढ़ावा देना इस मामले में काफी कारगर उपाय हो सकता है। सरकार कुछ ऐसे प्रोत्साहन दे सकती है जिसके तहत महंगे सामान, खासकर गहनों आदि की बिक्री में विक्रेता डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और दूसरे बैंकिंग साधनों के जरिए भुगतान लेने के लिए प्रोत्साहित हों। यह प्रोत्साहन ट्रांजैक्शन वैल्यू पर टैक्स देनदारी की गणना के समय आय में अतिरिक्त कटौती दिखाकर या वैट में कमी के तौर पर दिए जा सकते हैं।
देश भर में छोटे व्यवसायों को फास्ट मूविंग कंज़्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) कंपनियों की ओर से जारी चालानों के लिए एक सेंट्रल डेटाबेस स्थापित किया जाए। इस डेटाबेस का इस्तेमाल इन छोटे व्यवसायों द्वारा एफएमसीजी स्टोरों से सामान खरीदने और इनकी बिक्त्रस्ी के बारे में दी गई सूचना की प्रभावी ढंग से निगरानी करने में किया जा सकता है। यह छोटे व्यवसायों द्वारा रिपोर्ट की गई गड़बड़ी का पता लगाने और काले धन की पहचान में मददगार होगा।
सरकार इनकम टैक्स कानून में प्रावधानों को शामिल कर अनुमानित लाभ के आकलन के लिए योजना बनाने पर विचार कर सकती है, जिससे केवल नकद लेन-देन कर टैक्स के दायरे से बाहर रहने वाले प्रोफेशनल्स पर नजर रखी जा सके। राज्य सरकारों को खेती से होने वाली आय पर टैक्स के दायरे और मात्रा को बढ़ाने के लिए उपयुक्त तंत्र शुरू करने को प्रोत्साहित किया जाए।
रिपोर्ट के मुताबिक रीयल एस्टेट सौदों में ज्यादातर खरीदार रजिस्ट्रेशन शुल्क और टैक्स सौदे की कीमत के मुताबिक होने के कारण ज्यादा टैक्स और शुल्क देने से बचने के लिए कीमत घटा कर बताते हैं। ऐसे में प्रॉपर्टी के बाजार मूल्य का निर्धारण सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कराकर उसके आधार पर टैक्स और शुल्क का हिसाब लगाया जा सकता है।
इसके अलावा रिपोर्ट में टैक्स चोरी का पता लगाने के लिए आईटी ढांचा तैयार करने, टैक्स डिडक्शन एट सोर्स व टैक्स कलेक्शन एट सोर्स के प्रावधानों को बढ़ावा देने, आयकर रिटर्न न भरने वालों की पहचान कर टैक्स बेस को बढ़ाने और टैक्स ढांचे को आसान करने के सुझाव भी रिपोर्ट में दिए गए हैं।