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डेट: कम जोखिम के साथ अच्छा रिटर्न

Mon, 09 Dec 2013 12:13 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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निवेश की दुनिया बड़ी ही गतिशील है। परंपरागत निवेश के साधन जैसे सोना, जायदाद आदि में भी निवेश के नित नए इंस्ट्रूमेंट आते हैं जैसे कि सोना के लिए गोल्ड ईटीएफ आदि।
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निवेश के बाजार में डेट फंड की अवधारणा अब बहुत नई नहीं है। एक बड़ी सीमा तक सुरक्षित रिटर्न देने वाले इस विकल्प को लोग खूब अपना रहे हैं।

डेट इंस्ट्रूमेंट का दायरा बहुत बड़ा है जिसमें सामान्य निवेशक पशोपेश में पड़ सकता है। इससे बचने के लिए डेट फंड आधारित म्यूचुअल फंड उनके लिए मुफीद हो सकता है।

डेट से तात्पर्य ऐसे वित्तीय करार से है, जिसमें निवेशक को एक निश्चित अवधि के बाद ब्याज के साथ अच्छा रिटर्न हासिल होता है। इसे एक सुरक्षित निवेश माना जाता है।
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सीधे शब्दों में कहें तो जब कोई लेनदार कुछ अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद से देनदार को एक निश्चित समय के लिए उधार देता है, तो उसे डेट कहते हैं। डेट के जरिए निवेश बैंकिंग और पूंजी बाजार (कैपिटल मार्केट) दो चैनलों से होता है।

बैंकिंग चैनल में खुदरा निवेशक एक ऐसे कर्जदाता की भूमिका में रहता है, जो बचत खाता या सावधि जमा के रूप में बैंक को पूंजी उपलब्ध कराता है।

एनसीडी और एफएमपी भी हैं अच्छे विकल्प
डेट आधारित निवेश विकल्पों में हमारे देश में सबसे ज्यादा चलन बांड और डेट फंडों का है। हालांकि इसके अलावा भी कुछ डेट इंस्ट्रूमेंट हैं, जिन्हें निवेश के लिए चुना जा सकता है। इनमें कॉरपोरेट नॉन कंवर्टेबल डिबेंचर (एनसीडी) और फिक्स्ड मेच्योरिटी प्लान (एफएमपी) प्रमुख हैं।

सुरक्षित निवेश को तरजीह देते हुए अगर आप बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से अधिक रिटर्न की चाहत रखते हैं, तो एनसीडी का विकल्प चुन सकते हैं। कंपनियों द्वारा चुने गए इन डिबेंचरों में एफडी से ज्यादा ब्याज मिलता है।

हालांकि किसी कंपनी के एनसीडी में निवेश करने से पहले उसके वित्तीय रिकॉर्ड और रेटिंग आदि को ध्यान में जरूर रखना चाहिए। इसके अलावा कंपनी जिस क्षेत्र में कारोबार कर रही है, भविष्य में उसकी संभावनाएं कैसी हैं, इसपर गौर करना भी जरूरी है। इसी तरह एफएमपी के विकल्प को भी आजमाया जा सकता है। इसे आमतौर पर म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के एफडी के रूप में देखा व जाना जाता है।

यह क्लोज एंडेड डेट फंड होते हैं। एफडी में जहां रिटर्न सुनिश्चित होता है, वहीं एफएमपी में रिटर्न इंडिकेटिव होते हैं। यानी दर्शाए गए रिटर्न मिलने की प्रबल संभावना तो होती है, पर इसकी गारंटी नहीं होती।

दूसरे शब्दों में कहें, तो इसमें मेच्योरिटी के समय मिलने वाला रिटर्न निवेश के समय बताए गए रिटर्न से अलग हो सकता है। एक साल से अधिक के एफएमपी में निवेश करने पर आयकर में छूट भी हासिल की जा सकती है।
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