साइप्रस को दिवालिया होने से बचाने और यूरोजोन के तहत बनाए रखने के लिए उसे 10 अरब यूरो (13 अरब डॉलर) के कर्ज का पैकेज देने के प्रस्ताव पर यूरो क्षेत्र के देशों के बीच सहमति बन गई है।
यूरो क्षेत्र के वित्त मंत्रियों की आपात बैठक में साइप्रस के बैंकिंग क्षेत्र का आकार सीमित करते हुए 2018 तक उसकी अर्थव्यवस्था में बैंकिंग क्षेत्र का अनुपात यूरोपीय संघ के स्तर पर लाने के फार्मूले पर भी बैठक में सहमति बन गई।
इसके अलावा वित्त मंत्रियों की बैठक में यह भी तय हुआ कि साइप्रस के दूसरे सबसे बड़े बैंक लाइकी बैंक को धीरे-धीरे बंद कर दिया जाएगा।
यूरोपीय संघ की प्रमुख मांग है कि साइप्रस बैंकिंग क्षेत्र का दायरा घटाते हुए अपने बैंकों का पुनर्गठन करे, क्योंकि साइप्रस की अर्थव्यवस्था के मुकाबले उसका बैंकिंग क्षेत्र बहुत बड़ा है।
यूरोपीय संघ के देशों को चिंता है कि देश के अपेक्षा से ज्यादा बड़े बैंकिंग क्षेत्र का नियंत्रण कमजोर होने के चलते काले धन की पनाहगाह और मनी लांडरिंग के केंद्र के तौर पर साइप्रस का आकर्षण बढ़ रहा है।
गौरलतब है कि साइप्रस की संसद ने देश के खस्ताहाल बैंकिंग क्षेत्र को पूंजीगत सहायता देने के लिए बैंक जमाओं पर कर लगाने के प्रस्ताव को पिछले मंगलवार को खारिज कर दिया था। इसमें 20,000 और एक लाख यूरो के बीच जमाओं पर 6.75 फीसदी और इससे ऊपर की जमाओं पर 9.9 फीसदी की दर से एक बार शुल्क लगाने की योजना थी।
इससे 5.8 अरब यूरो (7.9 अरब डॉलर) जुटाने का लक्ष्य था।इस प्रस्ताव को साइप्रस की संसद ने खारिज कर दिया था। इससे एक सप्ताह पहले भी साइप्रस के लिए राहत प्रोत्साहन पैकेज पर यूरो जोन में सहमति बनी थी, पर पैकेज की कड़ी शर्तों के चलते साइप्रस की ओर से इसे ठुकरा दिया गया था, जिससे ग्लोबल बाजारों में अस्थिरता का माहौल बन गया था।
इस अस्थिरता को देखते हुए प्रयास किया जा रहा था कि साइप्रस के संकट का जल्द से जल्द कारगर समाधान ढूंढ निकाला जाए, ताकि ग्लोबल बाजारों की धारणा कमजोर न होने पाए। इसी के तहत एक बार फिर वित्त मंत्रियों की बैठक बुलाकर पैकेज पर नए सिरे से विचार विमर्श किया गया। यूरो समूह के अध्यक्ष ने बैठक के बाद बताया कि लाइकी बैंक को खत्म करने का निर्णय सबसे महत्वपूर्ण निर्णय है।