महंगाई के मोर्चे पर सरकार को राहत मिली है, लेकिन औद्योगिक उत्पादन ने बड़ा झटका दिया है। नवंबर महीने की खुदरा महंगाई दर गिरावट के साथ 4.3 फीसदी पर आ गई, तो अक्तूबर के औद्योगिक विकास दर (आईआईपी) में सालाना आधार पर 4.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यानी आईआईपी सिकुड़ गया।
खुदरा महंगाई दर के पांच फीसदी से कम होने और औद्योगिक उत्पादन में आई भारी गिरावट के बाद सरकार पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव बनता दिख रहा है। औद्योगिक संगठन पहले से ही ब्याज दरों में कटौती की मांग कर रहे हैं। खुदरा महंगाई दर में पिछले पांच महीनों से गिरावट हो रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अक्तूबर महीने की खुदरा महंगाई दर 5.52 फीसदी थी। नवंबर महीने में खुदरा महंगाई दर गिरावट के साथ 4.3 फीसदी होने केपीछे मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं, पेय पदार्थ और तंबाकू की कीमतों में आई कमी है। खुदरा महंगाई दर में इन तीनों की हिस्सेदारी 50 फीसदी तक है। नवंबर महीने में खाद्य महंगाई दर 3.1 फीसदी रही जो कि अक्टूबर माह में 5.59 फीसदी थी।
उधर उद्योगों की बात करें, तो अक्तूबर में बिजली, खनन और बेसिक गुड्स को छोड़ अन्य सभी उद्योगों के उत्पादन में गिरावट आई। सबसे अधिक बिजली उत्पादन में 13.3 फीसदी की बढ़ोतरी रही। खनन में 5.2 फीसदी तो बेसिक गुड्स में 5.8 फीसदी का इजाफा रहा।
वहीं, मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में 7.6 फीसदी, कंज्यूमर गुड्स में 18.6 फीसदी, कंज्यूमर ड्यूरेबल में 35.2 फीसदी, कंज्यूमर नॉन ड्यूरेबल में 4.3 फीसदी, कैपिटल गुड्स में 2.3 फीसदी, तो इंटरमीडिएट गुड्स में 3.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इस साल सितंबर महीने के औद्योगिक उत्पादन में 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। अक्तूबर माह में औद्योगिक उत्पादन के खराब प्रदर्शन के बाद चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-अक्तूबर में औद्योगिक उत्पादन की दर 1.9 फीसदी रह गई।