अमेरिका और यूरोपीय बाजारों की मंदी के चलते भारत के निर्यात में गिरावट का सिलसिला जारी है। गत दिसंबर में देश के निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 1.9 फीसदी की कमी आई है, लेकिन यह कमी नवंबर में आई 4.17 फीसदी की गिरावट से कम है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर तक निर्यात पिछले वर्ष की अपेक्षा 5.5 फीसदी गिर चुका है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस वर्ष के निर्यात लक्ष्य को हासिल करना तो दूर पिछले साल के स्तर को बरकरार रखना भी मुश्किल दिख रहा है।
वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, आयात में 6.26 फीसदी वृद्धि के चलते दिसंबर में कुल 17.6 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ है जो गत नवंबर में हुए 19.3 अरब डॉलर के व्यापार घाटे से कम है। लेकिन चालू वित्त वर्ष का कुल व्यापार घाटा बढ़कर 147 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। दिसंबर में तेल आयात में करीब 23 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि गैर तेल आयात में करीब एक फीसदी की कमी आई है।
दिसंबर के दौरान व्यापार घाटे के अपेक्षाकृत कम होने से सरकार को थोड़ी राहत मिली है। वाणिज्य सचिव एसआर राव का कहना है कि निर्यात में गिरावट का सिलसिला कुछ थमा है। इंजीनियरिंग समेत सभी क्षेत्रों में कुछ सुधार हुआ है। उधर, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (फिओ) के अध्यक्ष रफीक अहमद का कहना है कि दिसंबर के निर्यात में गिरावट का दो फीसदी के अंदर सीमित रहना कुछ उम्मीद जगाता है।
चालू वित्त वर्ष के बाकी महीनों में स्थिति सुधरने के आसार दिख रहे हैं। फिर भी मौजूदा स्थितियों को देखते हुए इस साल का निर्यात पिछले साल के बराबर रहना भी मुश्किल लग रहा है। उनका मानना है कि करीब 147 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुके व्यापार घाटे से रुपये पर दबाव बढ़ गया है।