फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रंगराजन कमेटी की सिफारिशों पर राज्यों से हो रहा विचार

Mon, 26 Nov 2012 09:55 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
विज्ञापन
विज्ञापन
चीनी उद्योग को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने को लेकर रंगराजन कमेटी की सिफारिशों पर सरकार विचार-विमर्श कर रही है। केंद्र सरकार ने इन सिफारिशों पर राज्य सरकारों से उनकी राय मांगी है। कुछ गन्ना किसान समिति की सिफारिशों का समर्थन कर चुके हैं। यह जानकारी खाद्य मंत्री केवी थॉमस ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी है।
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि रंगराजन समिति ने अपनी रिपोर्ट में चीनी मिलों को लेवी की बाध्यता से मुक्त करने की सिफारिश करते हुए कहा है कि वह राज्य सरकारें जो राशन दुकानों को जरिये लोगों को रियायती दरों पर चीनी उपलब्ध कराना चाहती हैं, सीधे बाजार से चीनी खरीद कर इसके इंतजाम कर सकती हैं और इसके दाम तय कर सकती हैं।

गौरतलब है कि लेवी के तहत चीनी मिलों को एक निश्चित मात्रा में अपने उत्पादन की दस फीसदी चीनी सरकार को रियायती दरों पर बेचनी पड़ती है, जिसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिये लोगों तक पहुंचाया जाता है। रंगराजन समिति ने इस बाध्यता को खत्म कर चीनी मिलों को खुले बाजार में चीनी बेचने की छूट देने की सिफारिश की है।
विज्ञापन


इसके अलावा चीनी उद्योग में सुधार के लिए समिति ने सरकारी निकायों द्वारा गन्ने का खरीद मूल्य निर्धारित किए जाने को बंद करते हुए मिलों द्वारा अपनी आय का 70 फीसदी किसानों से साझा करने की व्यवस्था बनाने की बात कही है। गौरतलब है कि चीनी उद्योग में सुधार के लिए गठित की गई रंगराजन कमेटी ऐसी पहली कमेटी नहीं है। इससे पहले टुटेजा कमेटी और थोराट कमेटी भी गठित की जा चुकी है, जिनकी सिफारिशें कभी लागू नहीं हो सकीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें