सार्वजनिक उपक्रम हिन्दुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) के प्रबंध निदेशक एम डी श्रीकुमार का मानना है कि प्रतिस्पर्धा के मौजूदा दौर में आउटसोर्सिंग कंपनियों की जरूरत बन गई है। हालांकि इसके कारण कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
श्रीकुमार ने अजमेर इकाई द्वारा नवनिर्मित एंग्युर व्हील हैड ग्राइंडिंग मशीन की संचालन शुरू करने के मौके पर कहा कि आउटसोर्सिंग से काम में गति आती है और देश में आउटसोर्सिंग का काम बाहरी कंपनियों की अपेक्षा देसी कंपनियों को ही दिया जा रहा है, जिसका लाभ अंतत: देश के श्रमिकों को ही मिल रहा है।
किसी भी उपक्रम में अपने उत्पाद को तैयार करने के लिए कुशल श्रमिकों की जरूरत होती है। उपक्रम यथासंभव कुशल श्रमिकों को नियुक्त भी करता है, लेकिन वर्तमान दौर में यदि आउटसोर्सिंग से कम लागत में उत्पाद तैयार हो सकता है तो इसे अपनाने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रबंधन के समक्ष वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती इस उपक्रम को श्रेष्ठ उपक्रम में लाने की है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा उत्पाद के लिए कच्चा माल जुटाने के लिए पूंजी का प्रबंध करना है कंपनी के पास पर्याप्त श्रम बल और आधुनिकतम तकनीक है, लेकिन पूंजी के अभाव में समय पर उत्पाद तैयार करने में दिक्कत आती है।
कुमार ने कंपनी की अजमेर, हैदराबाद, बंगलूरू, कोच्चि सहित लगभग छह इकाइयों के कार्य पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सभी इकाइयां लगभग लाभ की स्थिति में आ चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इनमें अजमेर की इकाई रोल मॉडल की भूमिका में है।
उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में अजमेर इकाई ने तयशुदा 40 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले आधा लक्ष्य हासिल कर लिया है। आगामी पांच महीनों में पूरे लक्ष्य हासिल कर लिए जाएंगे। कंपनी को घाटे से उबारने एवं लाभांश की स्थिति में लाने के लिये वर्ष 2020 तक इसका कुल कारोबार 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रतिस्पर्धा को देखते हुए एचएमटी नवीन क्षेत्रों मार्केटिंग साल्यूशंस, उपभोक्ता की आवश्यकतानुसार उपकरण निर्माण के साथ ही नए क्षेत्रों में कार्य करने की दिशा में प्रयास कर रही है।