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एक ऐसा कानून जिसमें नहीं होगी सजा

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भले ही नए कंपनी कानून के तहत कंपनियों के लिए अपने लाभ का दो फीसदी हिस्सा सीएसआर पर खर्च करना अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन यदि कोई कंपनी लक्ष्य को पूरा नहीं करती है, तो उस पर किसी तरह की पेनाल्टी या जुर्माना लगाया जाएगा, इसका प्रावधान कंपनी कानून में नहीं किया गया है।
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ऐसे में सरकार भले ही दावा कर रही है कि चालू वित्त वर्ष में कॉरपोरेट सोशनल रिस्पॉनसबिलटी (सीएसआर) के जरिए कंपनियां 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करेंगी, लेकिन वह पूरा होना आसान नहीं नजर आ रहा है। खास तौर पर जब अनिवार्यता पूरी न करने पर कंपनियों को किसी तरह की पेनाल्टी या जुर्माना लगने का डर नही होगा।

बताओ लक्ष्य क्यों नहीं किया पूरा?

कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि अंतिम नियम बनाने में पेनाल्टी का प्रावधान नहीं किया गया है। जबकि ड्रॉफ्ट नियम तय करते वक्त इस बात पर चर्चा की गई थी , कि कंपनियों से लक्ष्य को हासिल करने के लिए किस तरह के प्रवाधान किए जाए।

सीएसआर नियम में केवल इस बात के प्रावधान किए गए हैं, कि जो कंपनी पिछले तीन साल में 2 फीसदी का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएगी, उसे केवल अपनी बोर्ड रिपोर्ट में इसकी जानकारी देनी होगी। साथ ही सीएसआर समिति को ठोस वजह बनानी होगी, कि वह लक्ष्य क्यों नहीं पूरा कर पाई।
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1 अप्रैल से लागू हुआ नियम

एक अप्रैल से लागू सीएसआर कानून के तहत ऐसी कंपनियां जिनका टर्नओवर सालाना एक हजार करोड़ रुपये या उससे ज्यादा है। इसके अलावा कंपनी का नेटवर्थ कम से कम 500 करोड़ रुपये या फिर उनका शुद्ध लाभ पांच करोड़ रुपये और उससे ज्यादा है।

उन्हें सीएसआर के नियम लागू करने होंगे। जिसके तहत कंपनियों को अपने शुद्ध लाभ का दो फीसदी हिस्सा सीएसआर पर खर्च करना होगा। जो कि पिछले तीन साल की कमाई के औसत पर तय होगा।
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