देशभर के थर्मल पावर प्लांटों में कोयला भंडार की गंभीर स्थिति में करीब एक महीने के बाद सुधार आने की संभावना है। एक अधिकारी के मुताबिक अनुसार ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल), भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) तथा सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) की खानों में त्योहारों के बाद स्थिति में सुधार की संभावना है।
अधिकारी के अनुसार देश के पूर्वी हिस्से में त्योहारी मौसम काम के लिहाज से हल्का होता है। उस दौरान इन कंपनियों ईसीएल, बीसीसीएल और सीसीएल में कर्मचारियों की तादाद कम होती है। खानों में भंडार की स्थिति अक्तूबर मध्य से नियंत्रण में आने की संभावना है।
जमीन अधिग्रहण समस्याओं, पर्यावरण और वन मंजूरी में देरी और रेलवे के जरिए कोयले की ढुलाई में बाधाओं के कारण थर्मल पावर प्लांटों में ईंधन कोयले का भंडार प्रभावित हुआ। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के ताजा आंकड़ों (14 सितंबर) के अनुसार 53 थर्मल प्लांटों में सात दिन से भी कम का कोयला बचा है। इतना ही नहीं इन 53 बिजलीघरों में से 30 में चार दिन से कम का कोयला बचा है। सीईए ऊर्जा मंत्रालय को तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराता है।
अधिकारी ने कहा कि सरकार ने झारखंड के उत्तरी करणपुरा स्थित तोरी-शिवपुरी-कथोटिया खानों से 5 करोड़ टन अतिरिक्त कोयला उपलब्ध कराया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के महेंद्रगढ़ स्थित कोयला खानों को जोड़ने वाली रेल लाइन में सुधार हुआ है। इससे 2 करोड़ टन कोयले की ढुलाई में मदद मिलेगी। इन सभी उपायों से अगले महीने के मध्य से कोयले की स्थिति में सुधार की उम्मीद है।