मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ को अमल में लाने के लिए मोबाइल इंडस्ट्री को ईको सिस्टम की जरूरत है। कंपनियां निवेश के लिए तैयार हैं, लेकिन उसके लिए मोबाइल इंडस्ट्री को क्लस्टर और कुशल श्रमिकों के संसाधन उपलब्ध कराने होंगे। ऐसा सेलकॉन मोबाइल्स के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुरली रेतीनेनी का मानना है। इंडस्ट्री की जरूरतों के अलावा रेतीनेनी ने अपनी कंपनी की भावी योजनाओं के बारे में अमर उजाला के संवाददाता प्रशांत श्रीवास्तव से विस्तार से बातचीत की। पेश है प्रमुख अंश-
स्मार्टफोन बाजार तेजी से बढ़ रहा है, क्या आने वाले दिनों में फीचर्स फोन की तरह स्मार्टफोन भी आम आदमी की पहुंच में होंगे?
उत्तर- पिछले दो-तीन साल से स्मार्टफोन बाजार काफी तेजी से बढ़ा है। जिस तरह से फीचर फोन और स्मार्टफोन के बीच कीमत का अंतर घटता जा रहा है, उसे देखते हुए ज्यादा से ज्यादा एक साल में फीचर फोन पूरी तरह से बाजार से हट जाएंगे। बाजार में केवल महंगे स्मार्र्टफोन और कम कीमत वाले स्मार्टफोन की कैटेगरी रह जाएगी। सेलकॉन इस बाजार को देखते हुए 2,000 रुपये की कीमत में स्मार्टफोन उतार रही है। कंपनी 2,999 रुपये में एंड्रायड किट कैट फीचर के साथ स्मार्टफोन उतार चुकी है। कुल मिलाकर आने वाला समय स्मार्टफोन का ही है।
मोदी सरकार ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के जरिए भारत में मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देना चाहती है, क्या देश में मोबाइल फोन बनाना मौजूदा सुविधाओं में संभव है?
उत्तर- नई सरकार का प्रयास सराहनीय है। लेकिन देश में मोबाइल की मैन्यूफैक्चरिंग करना एक-दो कंपनियों के जरिए संभव नहीं है। सबसे बड़ी बाधा मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के लिए क्लस्टर और ईकोसिस्टम का न होना है। सेलकॉन भारत में मैन्यूफैक्चरिंग करने के लिए तैयार है, लेकिन उसके लिए जरूरी सपोर्ट चाहिए। हमें यह समझना होगा कि मोबाइल की मैन्यूफैक्चरिंग के लिए हमें उससे जुड़े कंपोनेंट जैसे बैटरी, चार्जर, मेटल्स, प्लास्टिक आदि की मैन्यूफैक्चरिंग को एक क्लस्टर के रूप में विकसित करना होगा। इसके अलावा उसके कुशल श्रमिकों को भी बड़े पैमाने पर तैयार करना होगा।
हाल ही में गूगल ने एंड्रायड वन फोन कार्बन, माइक्रोमैक्स और स्पाइस के साथ मिलकर उतारा है, सेलकॉन भी क्या इस साझेदारी का हिस्सा बनेगी?
उत्तर- हम इस दिशा में गूगल के साथ बातचीत कर रहे हैं, इसके लिए समझौते के दिशा में काम कर रहे हैं। जैसे ही औपचारिक समझौता हो जाएगा, हम उसकी निश्चित तौर पर घोषणा करेंगे। गूगल के अलावा सेलकॉन ने पिछले कुछ महीनों में स्नैपडील, फ्लिपकार्ट, एयरटेल, गेमलॉफ्ट आदि के साथ समझौता किया है। हाल ही में हमने 2,000 रुपये की कीमत वाले स्मार्टफोन कैंपस नोवा ए325ई के लिए ओपेरा ब्राउजर का समझौता किया है।
माइक्रोमैक्स, कार्बन जैसी देसी कंपनियों ने मोबाइल फोन बाजार में अग्रणी भूमिका बना ली है, ऐसे में सेलकॉन की क्या योजनाएं हैं?
उत्तर- सेलकॉन दूसरी कंपनियों की तुलना में काफी नई कंपनी है। पिछले पांच साल में कंपनी 1,000 करोड़ के कारोबार तक पहुंच चुकी है। बाजार में हमारी हिस्सेदारी 3 फीसदी है। अगले कुछ महीनों में कंपनी स्मार्टफोन के कई मॉडल बाजार में पेश करेगी, जिसमें आक्टाकोर और एलटीई (4जी) फोन भी होंगे। कंपनी को इस साल बाजार में अपनी हिस्सेदारी 3 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है।
उत्तर भारत को लेकर सेलकॉन की क्या योजनाएं हैं?
उत्तर- सेलकॉन का नेटवर्क पूरे देश में है। कंपनी अब उत्तर भारत में अपनी पहुंच और तेजी से बढ़ाना चाहती है। जिससे हम सुदूर क्षेत्रों में पहुंच सके। हमारा प्रमुख फोकस उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली पर है। इसके लिए हम अपने डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क में भी विस्तार करेंगे।