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कैश सब्सिडी: कदम-कदम पर आएगी अड़चन

Mon, 31 Dec 2012 10:17 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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सरकार ने कैश सब्सिडी योजना की घोषणा जितनी हड़बड़ी में की थी, उसे लागू भी उसी अफरातफरी में किया जा रहा है। योजना आधी-अधूरी तैयारी के साथ पहली जनवरी से देश के 20 जिलों में लागू हो रही है, लेकिन अभी इस इस पर सवाल उठने लगे हैं। कहा जा रहा है कि तैयारी पूरी नहीं होने की वजह से योजना को अमल में लाने में कदम-कदम पर परेशानी आएगी।
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9 करोड़ परिवारों तक पहुंच बड़ी चुनौती
विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सब्सिडी की राशि फिलहाल डाकघर, बैंक, पंचायत, स्कूल, अस्पताल और संबंधित विभागों के जरिए लोगों तक पहंची है। ऐसे में हर साल 9 करोड़ से ज्यादा परिवारों को करीब 30 हजार करोड़ रुपये का भुगतान करना बड़ी चुनौती होगी। चीन जैसा देश भी अभी सिर्फ 2.2 करोड़ परिवारों को ही नकद भुगतान करता है। इसमें थोड़ी सी भी चूक करोड़ों के घोटाले को जन्म दे सकती है।

बैंकों की सीमित पहुंच
तमाम सरकारी कवायद के बावजूद अभी बैंकों की पहुंच सिर्फ 35 फीसदी लोगाें तक है। आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग में वित्तीय सेवाओं की पहुंच और भी कम है। राजस्थान के अलवर की जिस तहसील में केरोसिन के बदले नकद भुगतान का पायलट प्रोजेक्ट चला, वहां एक साल में 40 फीसदी से ज्यादा लाभार्थियों के बैंक खाते नहीं खुल पाए। कई गांव बैंक शाखाओं से 7-8 किमी. दूर हैं।
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कमजोर आधार कार्ड
कैश सब्सिडी में लाभार्थियों की पहचान जिस आधार कार्ड पर टिकी है, वह खुद खामियों से भरपूर है। अलवर के पायलट प्रोजेक्ट में भी नकद भुगतान आधार के जरिए न होकर राशन कार्ड के जरिए करना पड़ा। पूरे देश की बात छोड़िए, जिन 43 जिलों में सबसे पहले कैश सब्सिडी योजना शुरू होनी थी, उनमें से सिर्फ 20 जिलों में ही आधार कार्ड की पर्याप्त पहुंच है।
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