यूपीए सरकार आगामी लोकसभा चुनाव से पहले हर हाल में ग्राहकों को फ्री रोमिंग का तोहफा देना चाहती है। इस मामले में सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह विरोध कर रही कंपनियों को राहत पैकेज देने पर विचार कर रही है।
सरकार कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए लाइसेंस फीस में कटौती का प्रस्ताव भी बना रही है। सरकार की कोशिश है कि फ्री रोमिंग सेवा जल्द से जल्द लागू हो और इसके बाद कॉल दरों में इजाफा भी न हो, जिससे कि कांग्रेस का चुनावी खेल न बिगड़े।
टेलीकॉम कंपनियों ने सरकार की इस साल देशभर में फ्री रोमिंग सेवा देने की योजना का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस सेवा से उन्हें लगभग 12,200 करोड़ का नुकसान होगा। कंपनियां इस मामले को अदालत ले जाने का मन बना रही हैं। कंपनियों के इरादे को देखते हुए सरकार सतर्क हो गई है।
उच्च पदस्थ सूत्रों का मानना है कि अगर सरकार एक प्रशासनिक आदेश के जरिए अपनी इस योजना को लागू करने के लिए कंपनियों पर दबाव बनाती है तो आने वाले दिनों में यह मामला पेचीदा हो सकता है। लिहाजा, सरकार ने सख्ती से पेश आने की बजाय नरमी बरतने का फैसला किया है।
सरकार जल्द ही कंपनियों को राहत देने के लिए पूरा प्रस्ताव उनके सामने रखेगी। सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि दूरसंचार विभाग को आशंका है कि अगर सरकार कंपनियों पर दबाव डालकर यह सेवा लागू करवाती है तो टेलीकॉम कंपनियां एकजुट होकर कॉल दरें बढ़ा सकती हैं। जिसका खामियाजा सरकार का चुनावी खेल बिगाड़ सकता है। इसलिए कंपनियों से टकराव नहीं लेने का फैसला किया गया है। वहीं दूरसंचार विभाग लाइसेंस फीस की मौजूदा आठ फीसदी दर को घटाकर छह फीसदी करने का मन बना रहा है।
टेलीकॉम विशेषज्ञ एससी खन्ना कहते है कि सरकार की ओर से कंपनियों को ऐसा बेल आउट पैकेज दिया जाना चाहिए, जो उन्हें मंजूर हो। इसके लिए कंपनियों के साथ बैठक होनी चाहिए और ट्राई को इस दिशा में राय मशविरा की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।