देश की 14 कार कंपनियों पर 2,545 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाने के बाद भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने कहा कि वह चाहता है कि स्पेयर पार्ट्स ग्राहकों के लिए कम खर्चीला हो।
उद्योग संगठन एसोचैम की ओर से आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीसीआई के चेयरमैन अशोक चावला ने कहा कि कार कंपनियों पर पेनाल्टी लगाने के पीछे आयोग का उद्देश्य यह है कि स्पेयर पार्ट्स के बाजार को उपभोक्ताओं के अनुकूल और कम खर्चीला बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि गाड़ियों के पुर्जों के बाजार और ऑटो कंपनियों की ब्रिकी के बाद की सेवाओं (आफ्टर सेल्स सर्विस) में सुधार लाने की ओर ध्यान देते हुए सरकार को भी इस दिशा में एक रूपरेखा तय करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कार कंपनियों पर जुर्माने के आदेश की प्रति सीसीआई सड़क एवं भूतल परिवहन मंत्रालय और स्पेयर पार्ट बनाने वाली कंपनियों के संगठन ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन (एसीएमए) को भी भेजेगा।
गौरतलब है कि सीसीआई ने अपनी जांच में पाया था कि कार कंपनियां कारोबार के गलत तौरतरीके अपना कर स्पेयर पार्ट और गाड़ियों की सर्विसिंग के बाजार पर अपना दबदबा कायम रखने का प्रयास कर रही हैं। इसी के चलते आयोग ने कार बनाने वाली देश की ऑटो 14 कंपनियों पर जुर्माना लगाया है।
इन कंपनियों में मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा व हिंदुस्तान मोटर्स सहित होंडा, फिएट, जनरल मोटर्स, टोयोटा, फोर्ड, स्कोडा, निसान, बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज की भारतीय इकाइयां भी शामिल हैं। इनमें से मारुति, महिंद्रा और टाटा मोटर्स सीसीआई के आदेश को चुनौती देने की बात कह चुकी हैं।