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एनडीए ने बहाल रखा यूपीए का टैक्स टेरर

Tue, 17 Mar 2015 09:10 PM IST
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
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उद्यमी अनिल अग्रवाल के स्वामित्व वाली कंपनी केयर्न इंडिया और वेदांता रिसोर्सेज को लगभग 31,000 करोड़ रुपये की कर वसूली के लिए आयकर विभाग की ओर से दो नोटिस का समय इससे बुरा नहीं हो सकता था। ये नोटिस ऐसे समय में आए हैं, जब प्रधानमंत्री दुनिया भर में भारत को निवेश के बेहतर स्थल के रूप में पेश कर रहे हैं। वहीं हाल में वित्त मंत्री अरुण जेटली ब्रिटिश संसद के बगल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण करने और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को संबोधित करने के लिए लंदन में थे।
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इन दोनों नोटिसों ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में न सिर्फ यूपीए शासनकाल के कर आतंकवाद की यादें ताजा कर दी हैं बल्कि इससे यह तथ्य भी सामने आया है कि नरेंद्र मोदी सरकार के तहत आयकर विभाग के काम काज के तरीके में कोई बदलाव नहीं हुआ है और सब कुछ पहले जैसा चल रहा है।

मोदी सरकार ने कर आतंकवाद खत्म करने और स्थिर कर ढांचा लाने का वादा किया था। इस घटनाक्रम से निश्चित रूप से निवेशकों में गलत संकेत गया है और भारत में निवेश की योजना बना रही कंपनियां या एमएनसी अब अधिक सतर्क होंगी और भारत को निवेश के पसंदीदा स्थल के रूप में देखने की अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करेंगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट में पेश किए गए बेहतर इरादों और अगले चार वर्ष में कॉरपोरेट टैक्स 30 फीसदी से घटा कर 25 फीसदी करने का उनका फैसला एक ही झटके में बेकार हो गया है। आयकर नोटिस संभव है कि कानून की प्रक्रिया का भाग हो लेकिन यह गलत समय पर आया है और आशंका है कि इससे विदेशी निवेशकों में नाराजगी पैदा होगी। केयर्न एनर्जी को 2006 में कथित तौर पर हुए कैपिटल गेन के लिए 10,247 करोड़ रुपये का भुगतान करने को कहा गया है।
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केयर्न इंडिया को 20,495 करोड़ रुपये के कर की मांग का नोटिस केयर्न एनर्जी द्वारा अर्जित किए गए कैपिटल गेन पर विदहोल्डिंग टैक्स काटने में विफलता के कारण दिया गया है। केयर्न इंडिया अब अरबपति अनिल अग्रवाल की स्वामित्व वाली कंपनी है। केयर्न एनर्जी ने 2011 में कंपनी में अपनी बहुलांश हिस्सेदारी बेच दी थी। दोनों कंपनियों ने कहा है कि वे कर नोटिस का विरोध करेंगी।

केयर्न एनर्जी ने यूके- इंडिया इन्वेस्टमेंट ट्रीटी के तहत डिस्प्यूट का नोटिस दिया है। इसका मतलब है कि भारत सरकार और केयर्न इंडिया इस मसले पर विचार विमर्श करेंगे या आर्बिट्रेशन के लिए जाएंगे। केयर्न इंडिया ने कहा है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए हर संभव विकल्प अपनाएगी। इन दोनों कर नोटिसों के परिणामस्वरूप विदेशी निवेशक अपनी निवेश योजनाओं का आकलन नए सिरे से कर रहे हैं। इसके अलावा शेयर बाजार में दोनों कंपनियों के शेयरों को भी तगड़ा झटका लगा है।
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