खुदरा बाजार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर चार और पांच दिसंबर को लोकसभा में चर्चा के दौरान व्यापारी सारे देश में विरोध दिवस मनाएंगे। इस दौरान कारोबारी 500 से अधिक जगहों पर जुगाड् राजनीति का पुतला दहन करेंगे। अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) के मुताबिक इस प्रदर्शन में किसान-हाकर्स, मजदूर, ट्रांसपोर्टर और लघु उद्यमी काली कपड़े पहनकर सांकेतिक अनशन करके अपना विरोध दर्ज करेंगे।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित धरने में खुदरा व्यापार में एफडीआई आखिर क्यों एक झांकी द्वारा देश में चल रही जुगाड़ राजनीति का पर्दाफाश करेंगे और पुतला दहन करेंगे। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा, 'अब समय आ गया है कि देशभर में व्यापारियों तथा अन्य वर्गों को एकजुट होकर वोट बैंक एफडीआई का विरोध करेंगे। अगले साल होने वाले विभिन्न विधानसभा चुनावों और 2014 में होने वाले आम चुनावों के मद्देनजर प्रत्येक संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्येक पोलिंग बूथ पर व्यापारी और अन्य वर्गों के लोग उन दलों के खिलाफ वोट देंगे जो दल एफडीआई का समर्थन कर रहे हैं।'
दोनों ने बताया कि कल कैट इस मुद्दे पर एक श्वेत पत्र जारी करेगा, जिसमें रिटेल व्यापार में एफडीआई लागू करने की अधिसूचना से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का ब्योरा दिया जाएगा। श्वेत पत्र में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अवहेलना-गलत आंकडों द्वारा सरकार द्वारा अपने निर्णय को जायज ठहराना-आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का अनुसरण न करना-वाणिज्य मंत्री द्वारा 25 नवंबर 2011 को संसद में रखे गए एफडीआई नीति से संबधित दस्तावेज तथा 20 सितंबर 2012 को जारी सरकार की अधिसूचना में भारी अंतर जिसके कारण विदेशी कंपनियों को अत्याधिक लाभ पहुंचाना आदि का खुलासा किया जाएगा।