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दोहरे अंक में आर्थिक विकास दर हासिल करने का रोडमैप है बजट

Mon, 02 Mar 2015 02:00 PM IST
budget has a rodmap to achive double digit growth
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इस बजट में भारत को दोहरे अंक में आर्थिक विकास दर की ओर ले जाने के लिए रोडमैप पेश किया गया है। हम न सिर्फ स्पष्ट दिशा दे रहे हैं, जिस पर अर्थव्यवस्था जा रही है बल्कि हमें वे अहम पड़ाव भी दिख रहे हैं, जिन्हें इस रास्ते पर पार करने हैं।
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बजट में न सिर्फ उद्योग जगत बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए तमाम सकारात्मक चीजें हैं। फिक्की दूरदृष्टि और बेहद प्रगतिशील और विजनरी बजट पेश करने के लिए वित्त मंत्री को बधाई देती है।

बजट आर्थिक स्थिति में सुधार के बीच पेश किया गया है। हालांकि जैसा आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था उबर रही है न कि तेजी से आगे बढ़ रही और ऐसे में यह जरूरी था कि फोकस वापस निवेश पर आए, जिससे अर्थव्यवस्था के उबरने की प्रक्रिया को मजबूती दी जा सके।
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बजट ने राजकोषीय अनुशासन पर समझौता न करते हुए ,इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए व्यय का प्रारूप बढ़ा कर ऐसा किया है। आने वाले वर्ष में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर 70,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च ग्रोथ को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलेगा और इससे निजी क्षेत्र के निवेश में भी तेजी आएगी।

हम देख रहे हैं कि लंबे समय के बाद इस बजट के साथ 2022 के लिए राष्ट्रीय लक्ष्य तय किया जा रहा है। 2022 भारत की स्वतंत्रता का 75 वां साल होगा।

केंद्र सरकार द्वारा बजट और उसके बाहर की गई घोषणा इन सामाजिक आर्थिक लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ने की दिशा में समेकित प्रयास मुहैया करा रहे हैं।

केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट के लिए प्रत्यक्ष कर रीजिम को तार्किक बनाने की योजना घोषित कर सरल कर ढांचे की ओर आगे बढ़ने की ओर प्रयास किया है। इसमें अगले चार वर्ष में कॉरपोरेट टैक्स की दर 30 फीसदी से घटा कर 25 फीसदी करने और एक्जैंपशन खत्म करना शामिल है। इससे कॉरपोरेट टैक्स स्ट्रक्चर को आसियान देशों की तर्ज पर रखने में मदद मिलेगी।


बजट में मेक इन इंडिया कार्यक्रम को भी मजबूती देने वाले उपाय किए गए हैं। इसके अलावा आरईआईटी और आईएनवीआईटी पर कर से जुड़े मामलों पर स्पष्टीकरण का भी हम स्वागत करते हैं।

पिछले बजट में रीयल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में फंड प्रवाहित करने के लिए अहम उपकरण के तौर पर इसकी घोषणा की गई थी। फिक्की इस बात को लेकर भी खुश है कि वित्त मंत्री ने गार पर अमल दो वर्ष तक टालने का फैसला किया है।

इसके अलावा ट्रांसफर प्राइसिंग के लिए सीमा बढ़ाने कर अधिकारियों की विवेकाधीन शाक्तियां कम करने की घोषणा से निवेशकों के विश्वास को और ज्यादा मजबूती मिलेगी।
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