ब्रिटेन की कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम (बीपी) ने गैस की कीमतें बढ़वाने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी है। इसके लिए बीपी ने प्रधानमंत्री (पीएम) नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि गैस के दाम बढ़ाए बिना देश की अर्थव्यवस्था में तेजी लाने और विकास को गति देने के प्रधानमंत्री के एजेंडे को पूरा नहीं किया जा सकता।
बीपी ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा है कि गैस की कीमतें न बढ़ाए जाने से देश के पेट्रोलियम और गैस सेक्टर में निवेश का माहौल भी प्रभावित होगा। बीपी भारत में 60 से 90 हजार करोड़ रुपये का निवेश करके अगले पांच साल में अपने उत्पादन में चार गुनी वृद्धि के साथ 40 से 50 मिलियन मीट्रिक स्टेंडर्ड क्यूबिक मीटर पर डे (एमएमएससीएमडी) के स्तर पर ले जाना चाहती है।
बीपी के कंट्री हेड शशि मुकुंदन ने पीएम को लिखे पत्र में कहा है कि 2011 में रिलायंस के 21 ब्लॉकों में करीब 441 अरब रुपये (7.2 अरब डॉलर) का निवेश कर 30 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद से ही बीपी इन ब्लॉकों से गैस का उत्पादन बढ़ाने के प्रयास कर रही है। इसके लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए वर्ष 2013 में वह दो नए गैस क्षेत्रों की खोज कर चुकी है। कंपनी गैस क्षेत्रों के उत्पादन को बंद होने से बचाने के लिए करीब 3,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुक है। इसके अलावा करीब इतना ही निवेश उत्पादन में कमी को रोकने के लिए भी किया गया है।
मुंकुंदन के मुताबिक बीपी अपनी साझेदार कंपनी रिलायंस के साथ मिलकर नए गैस क्षेत्रों के विकास के लिए करीब 24,000 करोड़ रुपये का निवेश और करने को तैयार है। अगले तीन-चार साल में वह 60 हजार से 90 हजार करोड़ का निवेश कर चौगुना उत्पादन करने की तैयारी में है, पर इस निवेश के लिए गैस की लंबे समय तक स्वीकार्य कीमतें तय किया जाना जरूरी है। गैस की कीमतें अगर नहीं बढ़ाई नहीं जाती हैं, तो कंपनी नई तकनीक और गहरे जलीय क्षेत्र से गैस निकालने की अपनी दक्षता का इस्तेमाल करने की स्थिति में नहीं रहेगी। मुकुंदन ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि गैस कीमतों में बढ़ोतरी के नई गैस परियोजनाओं के शुरू होने से गैस का आयात घटेगा। इससे हर साल करीब 613 अरब रुपये (10 अरब डॉलर) की बचत होगी, जो सरकार के लिए चालू खाते के घाटे को कम करने में काफी सहायक होगा।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखने से पहले भी बीपी गैस की कीमतें बढ़ाने को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय में इसके लिए आवाज उठाने के प्रयास करती रही है। वह पेट्रोलियम सचिव से बात करके यह भी कह चुकी है कि दरें बढ़ाए बिना उसके लिए गैस उत्पादन को 2 ट्रिलियन क्यूबिक फीट (टीसीएफ) के स्तर पर पहुंचाने के लिए करीब 736 अरब रुपये (12 अरब डॉलर) का निवेश कर पाना मुमकिन नहीं होगा।
कंपनी ने कहा है कि किसी गैस क्षेत्र की खोज करने की लागत ही उस क्षेत्र से कुल उत्पादन की लागत के करीब 10 तक बैठती है। इसके बाद 80 फीसदी लागत गैस क्षेत्र के पूरे जीवन काल तक उसके विकास पर खर्च होती है। ऐसे में अकसर कंपनियों को अपने जोखिम पर नए गैस क्षेत्र की खोज करने का खर्च उठाना पड़ता है। नए गैस क्षेत्र को खोज कर उसके विकास और फिर उत्पादन शुरू करने में औसतन 7 से 10 साल का वक्त लगता है। जलीय क्षेत्र से गैस उत्पादन में तो इससे 4 से 5 साल ज्यादा लग जाते हैं। ऐसे में गैस उत्पादन से जुड़ी इन चीजों पर गौर करते हुए गैस की कीमतें बढ़ाया जाना जरूरी है।