बीएसई का सूचकांक 854 अंक यानी 3.07 फीसदी की गिरावट के साथ 26,987.46 अंक पर बंद हुआ। शेयर बाजर में सितंबर 2013 के बाद से यह सबसे बड़ी गिरावट है।
सभी सेक्टरों में जोरदार बिकवाली के कारण एनएसई का निफ्टी भी 251 अंक यानी 3 फीसदी तक टूटा। तेल एवं गैस, रीयल्टी, मेटल, कैपिटल गुड्स शेयरों की सबसे ज्यादा पिटाई हुई। इसके अलावा पावर, कंज्यूमर ड्यूरेबल और बैंकिंग शेयरों में भी तेज गिरावट रही।
बीएसई सूचकांक ने दिन की शुरुआत गिरावट के साथ की और वैश्विक रुझानों के कारण दिन भर बिकवाली के दबाव में रहा। कारोबार के दौरान बीएसई का सूचकांक 27,000 के नीचे भी चला गया और आखिर में 26,987.46 पर पर बंद हुआ। शेयर बाजार में आई जोरदार गिरावट ने नरेंद्र मोदी सरकार के विनिवेश कार्यक्रम पर भी सवाल खड़ा कर दिया है।
ओएनजीसी और कोल इंडिया लिमिटेड के शेयरों को तगड़ा झटका लगा है। ऐसे में इन दोनो उपक्रमों में विनिवेश टलना तय माना जा रहा है। रिसर्च एंड फंड एडवाइजरी फर्म इक्विनॉमिक्स के संस्थापक जी.चोकलिंगम ने कहा बाजार कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को वैश्विक अर्थव्यवस्था में संभावित मंदी के लक्षण के तौर पर ले रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी और गिरावट भारत को निवेश के लिए ज्यादा आकर्षक बनाएगी।
शेयर बाजार में जोरदार गिरावट के लिए कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट को प्रमुख तौर पर जिम्मेदार माना जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतें मंगलवार को 49.95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गईं।
इससे पहले कच्चे तेल की कीमतें मई 2009 को इस स्तर पर पहुंचीं थीं। ब्रेंट भी 3.31 डॉलर गिर कर 53.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। दूसरे एशियाई बाजारों से कमजोर रुझान आने और यूरोप के शेयर बाजारों में भी कारोबार की कमजोर शुरूआत ने भी भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी धारणा को प्रभावित किया।
इस बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 472 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार में वापसी अहम साबित हो सकती है।