छोटे और मझोले उपक्रमों के लिए बनी सरकारी खरीद नीति का लाभ जिला औद्योगीकरण केंद्र (डीआईसी) में पंजीकरण कराकर कारोबारी उठा सकते हैं। मौजूदा सरकारी खरीद नीति में केंद्र सरकार के विभाग और सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) को अपनी कुल खरीदारी में से 20 फीसदी खरीददारी छोटे कारोबारियों से करने का प्रावधान किया गया है।
इसी के तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग ने हाल ही में संबंधित विभागों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। छोटे कारोबारी डीआईसी के अलावा खादी और ग्रामोद्योग (केवीआईसी), नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (एनएसआईसी) में भी पंजीकरण कराकर खरीद नीति के पात्र बन सकते हैं।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ने इस संबंध में संबंधित विभागों को पत्र लिखा है। इसके तहत डीआईसी, केवीआईसी, एनएसआईसी में पंजीकृत कारोबारी सरकारी खरीद का लाभ उठा सकेंगे। अभी केवल एनएसआईसी के तहत पंजीकृत ही लाभ उठा सकते थे। ऐसे में कारोबारियों के लिए जिला स्तर पर पंजीकरण कराने से सरकारी खरीद नीति के तहत शामिल होना आसान हो जाएगा।
अधिकारी के अनुसार कारोबारी की तरह सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी विभागों के लिए भी ऐसे कारोबारी ढूंढना मुश्किल होने की बात सामने आ रही थी। ऐसे में जिला स्तर तक आंकड़े तैयार होने से कारोबारी के साथ-साथ कंपनियों के लिए भी खरीद नीति की प्रक्रिया आसान हो सकेगी।
अधिकारी ने बताया कि सरकारी खरीद नीति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए भी 20 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। यह आरक्षण कुल खरीदारी के आरक्षण के तहत तय किया गया है। सरकारी खरीद नीति अप्रैल 2012 से लागू है, जिसके तहत पहले तीन साल खरीदारी के तहत किए गए आरक्षण का प्रावधान कंपनियों के लिए ऐच्छिक है, उसके बाद यह अनिवार्य होगा।
इंडस्ट्री के अनुसार सरकारी खरीद नीति से छोटे कारोबारियों को करीब 35,000 करोड़ रुपये का सालाना सुनिश्चित कारोबार मिल सकेगा। देश में इस समय कुल 2.61 करोड़ छोटे और मझोले कारोबारी हैं, जिसमें से 90 फीसदी से ज्यादा छोटे कारोबारी हैं।