डेबिट और क्रेडिट कार्ड से जुड़े फ्रॉड रोकने के लिए रिजर्व बैंक ने महत्वपूर्ण इंतजाम किया है। इसके तहत अब दूसरे देशों में वे ही कार्ड चलेंगे जिन्हें बैंक से विशेष आवेदन के जरिए हासिल किया गया है। इन कार्ड में विशेष चिप लगाई जाएगी। इस व्यवस्था को 30 जून के पहले सभी बैंकों को लागू करना होगा। इस तिथि तक मौजूदा कार्डों को ग्राहकों की पसंद के हिसाब से बदलना होगा।
रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को वित्तीय वर्ष 2012-13 की समाप्ति तक अल्टरनेट चैनल यानी एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग आदि के जरिए कुल लेन-देन का पचास फीसदी लेन-देन करने के निर्देश दिए हैं। बैंक इस लक्ष्य को काफी हद तक पूरा भी कर चुके हैं। मगर इसके साथ ही कार्ड से जुड़े फ्रॉड भी बढ़ रहे हैं। इसमें ज्यादातर फ्रॉड के मामले ऐसे हैं, जिनमें कार्ड का डेटा दूसरे देश में इस्तेमाल हुआ है।
इसे देखते हुए रिजर्व बैंक के मुख्य महाप्रबंधक विजय चुग ने बुधवार को ‘इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट ट्रांजेक्शन’ की सुरक्षा से संबंधित अधिसूचना जारी करके सभी बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे सभी प्रकार के कार्ड सिर्फ घरेलू उपयोग के लिए ही जारी करेंगे। इंटरनेशनल यूज के डेबिट-क्रेडिट कार्ड खास मांग पर ही ग्राहकों को उपलब्ध कराए जाएंगे, जो खास यूरो मास्टर वीजा (ईएमवी) चिप युक्त होंगे। विशेष क्रेडिट कार्ड के साथ विशेष पिन भी मिलेगा।
ग्राहक ऐसे ही कार्ड से दूसरे देशों में किसी प्रकार का लेन-देन कर पाएंगे। वर्तमान ग्राहकों के कार्ड उनकी मांग के आधार पर परिवर्तित किए जाएंगे। इसके लिए अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित की गई है। वर्तमान में सभी कार्ड विदेशों में लेन-देन के लिए मान्य हैं। इनके डेटा का दुरुपयोग रोकने के मकसद से रिजर्व बैंक ने यह भी निर्देश दिए हैं कि 30 जून के पूर्व इन कार्ड के इंटरनेशनल यूज की राशि फिक्स कर दी जाए। यानी यदि किसी कार्ड के डेटा का दुरुपयोग हो भी तो नुकसान कम से कम हो।
पंजाब नेशनल बैंक के एजीएम एलके चानना ने कहा कि इस संबंध में सभी शाखा प्रबंधकों को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे अपने ग्राहकों से उनकी मर्जी पूछकर कार्ड बदलवाने की कार्यवाही शुरू करें। उधर, बैंकिंग मामलों के जानकार हेमंत गुप्ता ने इस व्यवस्था को साइबर फ्रॉड रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।