पश्चिम बंगाल के शारदा समूह के चिट फंड घोटाले पर राजनीतिक बवाल खड़ा होने के बाद वित्त मंत्रालय में चिट फंड कंपनियों को लेकर हलचल बढ़ गई है।
वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाले डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी शारदा मामले में कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी है।
निवेशकों को पैसा हड़पने वाली बाकी चिट फंड कंपनियों पर विभाग बैंकिंग कानून के जरिए शिकंजा कसना चाहता है। इसमें विभाग ने सरकार से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की भूमिका बढ़ाने की भी मांग की है।
गिरफ्तार हो चुके शारदा समूह के अध्यक्ष सुदीप्तो सेन की सीबीआई को लिखी चिट्ठी में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम का जिक्र आने के बाद वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने इस मामले पर चुप्पी साध ली है।
वित्तीय हेराफेरी और निवेशकों से ठगी रोकने के लिए तमाम एजेंसियों होने के बावजूद चिट फंड धांधली के बढ़ते मामलों को देखते हुए मंत्रालय अब तमाम एजेंसियों के बीच तालमेल पर जोर दे रहा है। शुक्रवार को इस मुद्दे पर वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक हुई।
मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शारदा समूह की तमाम धांधलियों की जांच का जिम्मा फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) को भी सौंपा जा सकता है। हालांकि कई एजेंसियां पहले की जांच शुरू कर चुकी हैं। लेकिन सरकार अपनी तरफ से किसी तरह की कोताही का संकेत नहीं देना चाहती है।
मिली जानकारी के अनुसार, बैंकिंग सचिव राजीव टकरू ने चिट फंड कंपनियों की धांधलियों पर अंकुश लगाने में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की भूमिका बढ़ाने की मांग की है।
फिलहाल चिट फंड से जुड़े मामलों की जांच स्पेशल फ्राड इंवेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) और निवेशकों से धोखाधड़ी के मामले की जांच सेबी की ओर से कराई जा रही है।
एसएफआईओ ने पश्चिम बंगाल, ओडिसा, बिहार और असम में कार्यरत 57 कंपनियों की जांच शुरू कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय भी शारदा समूह के खिलाफ मनी लॉड्रिंग की जांच के लिए मामला दर्ज कर चुका है।
ठगी रोकने में बेबस उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय
उपभोक्ताओं को विभिन्न स्कीमों में निवेश का लालच देने के मामलों की रोकथाम में उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय पूरी तरह बेबस नजर आता है। कई रिटेल और रीयल एस्टेट कंपनियां ग्राहकों को निवेश के ऑफर दे रही हैं, जिसमें बड़े पैमाने पर ठगी की आशंका है।
ऐसे शिकायतों को उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय राज्यों के हवाले कर पल्ला झाड़ रहा है। उपभोक्ता मामलों के सचिव पंकज अग्रवाल का कहना है कि अपनी तरफ से जांच का अधिकार मंत्रालय के पास नहीं है। वैसे भी इंटरनल ट्रेड राज्यों का विषय है। परेशानी होने पर उपभोक्ता अपनी शिकायत कंज्यूमर फोरम में दर्ज करा सकते हैं।