कॉरपोरेट लोन के वितरण में तेजी लाने के लिए वित्त मंत्रालय बैंकों के लिए कंसोर्सियम बनाकर कर्ज देने के मौजूदा नियमों में ढील दे सकता है। वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए अप्रैल 2012 से 150 करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज पर कंसोर्सियम के जरिए कर्ज देने के निर्देश दे रखे हैं। इसके तहत 150 करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज देने पर कई बैंकों को मिलकर कर्ज देने का प्रावधान है।
सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय इस संबंध में एक समिति बनाकर बैंकर्स की राय ले चुका है। जिसकी सिफारिशों के आधार पर नियमों में ढील दी जा सकती है। एक प्रमुख बैंकर के अनुसार 150 करोड़ रुपये की सीमा काफी कम है। इस समय जब कॉरपोरेट लोन की मांग कम है, ऐसे में समूह बनाने का प्रावधान छोटे बैंकों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है, तो उसका असर सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के कारोबार पर पड़ रहा है।
कॉरपोरेट निजी क्षेत्रों के बैंकों की ओर रुख कर रहे है। अप्रैल में आए निर्देश के बाद अभी तक इस तरह से कोई कर्ज बैंकों ने नहीं दिया है। वित्त मंत्रालय ने अपने निर्देश के तहत भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के लिए यह ऐच्छिक और दूसरे सार्वजनिक बैंकों के लिए अनिवार्य रुप से कर्ज देने के निर्देश दे रखे हैं। मंत्रालय ने बढ़ती गैर निष्पादित संपत्तियों को देखते हुए यह निर्देश जारी किए थे।
सूत्रों के अनुसार जिस तरह कॉरपोरेट लोन की मांग कम हो रही है और सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के कारोबार पर असर हो रहा है, उसे देखते हुए कंसोर्सियम बनाने के नियमों में अब ढील देने की संभावना है।