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एसएमई कर्ज के मामले बैंक लक्ष्य से पीछे

Mon, 12 Nov 2012 08:50 PM IST
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
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देश के प्रमुख बैंक छोटे और मझोले उपक्रमों को दिए जाने वाले कर्ज की रफ्तार में तेजी नहीं ला पाए हैं। बैंक वित्त वर्ष 2011-12 की तरह इस साल भी पहले छह महीने में आरबीआई द्वारा तय किए गए लक्ष्य से काफी पीछे चल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय वित्त मंत्रालय और आरबीआई से भी बैंकों को कर्ज देने में तेजी लाने के निर्देश देने की सिफारिश कर चुका है।
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भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार सितंबर महीने तक छोटे उपक्रमों को 2,600 अरब रुपये का कर्ज मिला है, जो कि सितंबर 2011 की तुलना में केवल सात फीसदी ज्यादा है, जबकि 2011 में सेक्टर को मिले कर्ज की ग्रोथ 13.7 फीसदी रही थी। इसी तरह मझोले उपक्रमों के मिले कर्ज में 1957 अरब रुपये के मुकाबले 1968 अरब रुपये की ही बढ़ोतरी रही है, जो कि केवल 0.6 फीसदी ज्यादा थी। इसी तरह प्राथमिकता क्षेत्र के तहत छोटे कारोबारियों को मिलने वाले कर्ज में 19.3 फीसदी की बढ़ोतरी के मुकाबले केवल 8.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार साल 2011-12 की तरह ही इस साल भी बैंक आरबीआई के लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पा रहे है। पहले छह महीने के आंकड़ों को देखा जाए, तो पिछले साल से भी ग्रोथ कम है। अधिकारी के अनुसार इस संबंध में मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय और आरबीआई से कहा है कि बैंकों को जरूरी निर्देश दिए जाएं।
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अधिकारी के अनुसार स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, यूनाइटेट बैंक ऑफ इंडिया, विजया बैंक और स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, इलाहाबाद बैंक आदि बैंक विभिन्न लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाए थे। भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार सभी बैंकों को छोटे और मझोले उपक्रमों को उनके जरिये दिए जाने वाले कुल कर्ज में छोटे उपक्रमों को साल 2010-11 में 50 फीसदी, 2011-12 में 55 फीसदी और साल 2012-13 में 60 फीसदी कर्ज देना है। साथ ही छोटे कारोबारियों (माइक्रो एंड स्मॉल) को दिए जाने वाले कर्ज में 20 फीसदी हर साल बढ़ोतरी करनी है।
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