फ्रेंक इस्लाम एक डायनेमिक उद्यमी हैं और उतना ही रोमांचक है उनके अबतक के जीवन का सफरनामा। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में जन्मे फ्रैंक वाराणसी में पले-बढ़े और कुछ नया करने का स्वप्न लेकर अमेरिका की धरती पर कदम रखा।
आखिरकार, स्वप्न उस वक्त हकीकत में बदलता दिखाई दिया जब फ्रेंक ने 1994 में अपनी आईटी कंपनी दि क्यूएसएस ग्रुप की स्थापना की। उस वक्त वह इसके एकमात्र कर्मचारी थे।
बहरहाल, इस्लाम ने 2007 में जब यह कंपनी बेची, तो उस वक्त दि क्यूएसएस ग्रुप में 2,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत थे और बिक्री करीब 30 करोड़ डॉलर थी। फिलहाल फ्रैंक सिविक, शैक्षणिक और कला के क्षेत्र में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराते हैं।
उनसे सहायता पाने वाले संगठनों में कोलोराडो यूनिवर्सिटी, मोंटगोमेरी कम्यूनिटी कॉलेज, स्टार्थमोर सेंटर फॉर दि परफार्मिंग ऑर्ट्स और यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस शामिल हैं। फ्रैंक कई बोर्ड और एडवाइजरी काउंसिल में अपनी सेवाएं देते हैं।
उनमें जॉन एफ कैनेडी सेंटर फॉर परफार्मिँग ऑर्ट्स, द ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन, द वूडरॉ विल्सन सेंटर, जॉन हॉपकिंग्स यूनिवर्सिटी और जॉर्ज मसॉन यूनिवर्सिटी शामिल हैं।
हाल ही में अपनी भारत यात्रा के दौरान फ्रैंक इस्लाम ने अपने देश और अपने प्रदेश (उत्तर प्रदेश) के खासकर युवाओं और छोटे-मझोले उद्योगों के लिए कुछ करने की अपनी योजना के बारे में अमर उजाला के सुजय मेहदूदिया से लंबी बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश-
आजमगढ़ जैसे छोटे शहर में पैदा होने वाले फ्रैंक आज अमेरिकी कॉरपोरेट जगत और भारतीय समुदाय के शीर्ष लोगों की जमात में शामिल हैं। एक महत्वपूर्ण शख्सियत के रूप में अपने इस उद्भव को आप कैसे देखते हैं?
मेरा जन्म आजमगढ़ में हुआ और पवित्र शहर बनारस में परवरिश, जिसका प्रतिनिधित्व आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। मैं अमेरिका एक सपने के साथ पहुंचा। अमेरिका के खुलेपन और समग्रता की भावना ने मुझे काफी अवसर प्रदान किया, और इसकी बदौलत आज मैं यहां हूं।
ऊर्जावान युवा आबादी के साथ और प्रधानमंत्री मोदी के विजन के तहत आज हम भारत के लिए ऐसा ही कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी भारत में कारोबार करने के लिए नई दृष्टि, नई ऊर्जा और नई दिशा लेकर आए हैं। मैं पूरी तरह आशान्वित हूं कि वह आश्चर्यजनक काम करेंगे और इस देश को और अधिक संपन्न बनाएंगे।
मोदी की अमेरिका यात्रा और उससे तैयार हुए बेहतर माहौल को देखते हुए आपको क्या लगता है, यहां से भारत-अमेरिका के संबंध किस तरह आगे बढ़ेंगे?
मोदी की अमेरिका यात्रा को लेकर अत्यधिक उत्साह और रोमांच था। यह धनाढ्य भारतीय समुदाय और अमेरिकी बिजनेस समुदाय के साथ मिलने का भी एक अवसर था। अब हमें भारत के साथ अपने संबंध अधिक व्यापक और मजबूत बनाने की जरूरत है।
हमें भारत के साथ एक मजबूत और सहयोगात्मक भागीदारी की आवश्यकता है। भारत एक अनिवार्य भागीदारी है और लोकतंत्र, साझा हित एवं साझा मूल्य जैसी तमाम चीजें भारत के साथ कॉमन हैं। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी कहा है कि 21वीं सदी में अमेरिका के लिए भारत के साथ फिर से जवान हो रहे रिश्ते एक अहम पल हैं।
आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच बेहतर रिश्ते के लिए आप किस तरह के रोडमैप की आवश्यकता देखते हैं?
भारत यात्रा के दौरान मैं कई मंत्रियों और कारोबार जगत के लोगों से मिला। मुझे उनमें नया उत्साह, आशावाद और काफी उम्मीद दिखाई दी, जिसके साथ हम भारत को आगे ले जाएंगे। मुझे उम्मीद है कि मोदी के नेतृत्व में भारत आगे प्रगति करेगा। मेरा ऐसा मानना है कि अमेरिका में कारोबारी समुदाय से काफी उम्मीदें हैं, इसे मूर्त रूप देने के लिए हमें एक मजबूत व्यापारिक संबंध की आवश्यकता है।
मेरा मानना है कि 2020 तक भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में काफी व्यापकता आएगी। भारत को अपना बुनियादी ढांचा बेहतर बनाने, भ्रष्टाचार और कारोबार से जुड़ी कागजी कार्रवाइयां कम करने और नौकरशाही को नियंत्रित करने की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है।
अमेरिका को भी भारतीय समुदाय के साथ कम करने की जरूरत है। अमेरिकी उद्यमी 35 करोड़ भारतीय मध्य वर्ग को अपने उत्पादों और सेवाओं के लिए एक बेहतर अवसर के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रौद्योगिकी अमेरिका से भारत हस्तांतरित होगी। हम ऊर्जा क्षेत्र में कार्य करने के लिए तैयार हैं और हरित ऊर्जा फोकस में होगी। बुनियादी ढांचा क्षेत्र के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी काफी अहम है।
पर्यावरण, प्रदूषण, शिक्षा और संकाय विनिमय कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर भी हमें एक साथ आगे आने की जरूरत है।
भारत के खिलाफ अमेरिका में कई संगठनों द्वारा कारोबार से जुड़ी कई जांचें चल रही हैं, इनमें कुछ अमेरिकी कारोबारी प्रतिनिधि (यूएसटीआर) भी कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत बनाने में इन चीजों से पैदा हो रही समस्याओं को आप कैसे देखते हैं?
हमें संबंधों को रणनीतिक स्तर पर ले जाने की जरूरत है और वास्तव में एक भागीदारी होनी चाहिए। व्यापारिक विवादों के लिए मैं यह शब्द इस्तेमाल नहीं करूंगा कि भारत के खिलाफ जांच की जा रही है।
इसके बजाय, मैं यह कहूंगा कि अर्थव्यवस्था, व्यापार और आर्थिक सुधारों (जिनके वायदे पिछली सरकारों ने किए और उन्हें पूरा नहीं किया गया) की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ चिंताएं हैं। भारत में कारोबार करना बहुत कठिन है। सच्चाई यह है कि हमारे कुछ मुद्दे और चुनौतियां हैं।
प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री अरुण जेटली दोनों ने सुधारों का वायदा किया है। मैं इन्हें विवाद नहीं मानता हूं, यह चुनौतियां हैं। भारत के लिए अमेरिका एक नेचुरल पार्टनर है और हमें यह सुनिश्चित करना है कि मजबूत भारत दुनिया को एक नया स्वरूप देगा।
मई 2014 में भारत में नई सरकार के आकार लेने के बाद अमेरिका में निवेशकों का सेंटीमेंट कैसा है?
अमेरिकी निवेशकों का सेंटीमेंट काफी मजबूत है। इनमें एनआरआई समुदाय भी शामिल है। यह सेंटीमेंट और मूड भारत के साथ संबंधों को मजबूत बनाने के लिए है।
कारोबार की राह आसान करने और भ्रष्टाचार की घटनाओं को कम करने के लिए है। तमाम निवेशक ऊर्जा से भरपूर हैं और भारत में उनकी गहरी रुचि है। मैं भारत के लिए व्यापक कारोबारी सेंटीमेंट को उभरते देख रहा हूं।
आने वाले महीनों में अमेरिका से बड़ी संख्या में एफडीआई प्रवाह होगा। हमें संबंधों को दोबारा से गति देने और इसे साझेदारी में बदलने की जरूरत है। अमेरिकी निवेशकों की कुछ बड़ी चिंताओं को दूर करने की जरूरत है। इनमें रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स कानून, लालफीताशाही, कमजोर बुनियादी ढांचा, नौकरशाही जैसे मुद्दे काफी अहम हैं।
एनआरआई के लिए टैक्स एक बड़ा मसला है और इसको लेकर कुछ सवाल हैं लेकिन हम वित्त मंत्री के साथ इस मसले पर बातचीत कर रहे हैं। जिससे कि एनआरआई के लिए दोहरे कराधान के मामलों को कम किया जा सके। मेरा मानना है कि जल्द ही कर सुधार होंगे।
अपने कारोबार के बारे में कुछ प्रकाश डालें। उत्तर प्रदेश का एक व्यक्ति कैसे अमेरिका में स्थापित हुआ?
मेरी कंपनी एफआई इन्वेस्टमेंट्स अधिकांशत: छोटे एवं मध्यम श्रेणी (एसएमई) की कंपनियों में निवेश करती है। आईटी सेक्टर में रुझान था और 1994 में खुद एक कंपनी बनाई थी और उस वक्त मैं उसका एकमात्र कर्मचारी था। बाद में यह 30 करोड़ डॉलर मूल्य और 2,000 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनी बनी।
हालांकि, मैंने इस कारोबार से निकलने का फैसला किया और स्वयं के लिए आईटी और ऊर्जा क्षेत्र में स्थान बनाया और भारत में निवेश के लिए यह दोनों मेरे लक्षित क्षेत्र हैं। मैं भारत को आईटी और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में एक नेचुरल पार्टनर के रूप में देखता हूं।
हम एसएमई के लिए कुछ करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं क्योंकि इनमें विस्तार, आर्थिक विकास और देश की उन्नति में काफी योगदान देने की क्षमता है। भविष्य में एसएमई ग्रोथ का इंजन बनेंगे। कृषि एक अन्य क्षेत्र हैं जहां हम निवेश करना चाहेंगे।
भारत में निवेश और अपने देश और यहां के लोगों खासकर उत्तर प्रदेश को कुछ देने की काफी इच्छा है। प्रधानमंत्री द्वारा लांच किए गए स्वच्छ भारत अभियान को लेकर भी मैं बहुत उत्साहित हूं और किसी रूप में इसका हिस्सा भी बनना चाहूंगा।