महंगाई के मोर्चे पर सरकार के लिए एक और राहत भरी खबर थोक महंगाई के आंकड़े में नरमी के रूप में आई है।
फल और सब्जियों समेत खाद्य वस्तुओं के मंदा होने से थोक मूल्य सूचकांक (डब्लूपीआई) पर आधारित महंगाई दर साढे़ तीन वर्ष के निचले स्तर 4.89 फीसदी पर आ गई।
मार्च में यह 5.96 फीसदी पर थी, जबकि एक साल पहले की बात करें, तो अप्रैल 2012 में थोक महंगाई 7.50 फीसदी के स्तर पर थी।
खुदरा के बाद थोक महंगाई के आंकड़ों में गिरावट ने बाजार में कर्ज सस्ता होने की उम्मीद भी जगा दी है, क्योंकि पिछली मौद्रिक समीक्षा में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने महंगाई के ऊंचे स्तर का हवाला देते हुए रेपो दर में चौथाई फीसदी की मामूली कटौती करते हुए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कोई राहत नहीं दी थी।
इससे फंड की लागत में कमी न आने के चलते बैंकों ने ग्राहकों के लिए कर्ज सस्ता नहीं किया। महंगाई को नीचे लाने में सब्जियों की कीमतों में नरमी का मुख्य योगदान रहा।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की तरफ से मंगलवार को जारी महंगाई के मासिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में सब्जियों की कीमतें मार्च के ऋणात्मक 0.95 फीसदी की तुलना में त्रणात्मक 0.95 फीसदी पर आ गईं।
अप्रैल में फलों की महंगाई दर 4.71 प्रतिशत की तुलना में 0.71 फीसदी रही। हालांकि प्याज की महंगाई में मामूली ही कमी हुई। यह 94.85 की तुलना में 91.69 फीसदी पर रही। गेहूं की महंगाई दर भी 19.87 फीसदी की तुलना में 13.89 फीसदी पर रही। आलू में भी गिरावट का रुख रहा।
चावल और मोटे अनाज की महंगाई दर नरम पड़कर क्रमश: 17.09 व 15.63 फीसदी पर रही। दालों में भी नरमी का रुख दिखा।
अंडा, मांस, मछली जैसे प्रोटीन वाली वस्तुओं की महंगाई दर 10.44 फीसदी व दूध की महंगाई दर 4.04 फीसदी पर रही।
सोमवार को जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर खुदरा महंगाई के आंकड़ों में यह कई महीनों के बाद दहाई अंक से नीचे 9.39 फीसदी पर दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार ईंधन एवं ऊर्जा श्रेणी की महंगाई दर 10.18 प्रतिशत की तुलना में घटकर 8.84 प्रतिशत रह गई।
कर्ज सस्ता होने की उम्मीद
खुदरा व थोक महंगाई के आंकड़ों में गिरावट के एक के बाद एक आए आंकड़ों ने कर्ज सस्ता होने की उम्मीद जगाई है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि महंगाई में कमी आने से रिजर्व बैंक के समक्ष ब्याज दरों को और नीचे लाने का एक ठोस आधार मिलेगा।
रिजर्व बैंक ने हाल ही में घोषित ऋण एवं मौद्रिक नीति की समीक्षा में महंगाई को लेकर अपनी चिंता बरकरार रखी थी और अल्पकालिक ब्याज दरों में केवल 0.25 प्रतिशत की कटौती करते हुए आगे इसमें कमी नहीं किए जाने के संकेत दिए थे।
महंगाई दर में नरमी के इन आंकड़ों के बाद अब उम्मीद जगी है कि आरबीआई 17 जून को घोषित होने वाली अपनी छमाही मौद्रिक समीक्षा में नरमी दिखाते हुए ब्याज दर व सीआरआर में एक साथ कमी कर सकता है, क्योंकि महंगाई की दर में कमी आने से उसके समक्ष सहज स्थिति होगी।
मौद्रिक समीक्षा में रिजर्व बैंक ने महंगाई की दर चालू वित्त वर्ष के अंत तक पांच से साढे़ पांच फीसदी तक आने का अनुमान जताया था।
गिरावट को अप्रत्याशित मान रहे विश्लेषक
विश्लेषक थोक मूल्य आधारित महंगाई दर में गिरावट को अप्रत्याशित मान रहे हैं। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि अप्रैल में यह 5.50 फीसदी के स्तर पर रहेगी।
ऐसे में 4.89 फीसदी का आंकड़ा उम्मीद से बेहतर माना जा रहा है। नवंबर 2009 के बाद थोक महंगाई दर पहली बार इतनी नीचे आई है। उस समय यह 4.78 प्रतिशत थी।
आंकड़ों के अनुसार थोक मूल्य सूचकांक में 14.34 प्रतिशत का भारांक रखने वाले प्राथमिक वस्तुओं के वर्ग की महंगाई दर एक माह पहले के 8.73 प्रतिशत की तुलना में घटकर 6.08 फीसदी रह गई।
विनिर्माण वर्ग की महंगाई दर, जिसका थोक मूल्य सूचकांक में करीब दो तिहाई हिस्सा है, भी मार्च के 4.07 फीसदी के मुकाबले गिरकर 3.41 प्रतिशत पर आ गई। महंगाई के संशोधित आंकड़ों में यह फरवरी माह के दौरान पहले के अनुमानित 6.84 फीसदी की तुलना में 7.28 फीसदी पर आ गई गई।