कॉरपोरेट द्वारा खर्चे कम करने की चिंता और सतर्क रवैये के चलते देश के प्रमुख शहरों में लीज पर जगह (ऑफिस स्पेस) लेने की गतिविधियों में सुस्ती आई है। 2012 के दौरान देश के अधिकांश जगहों पर प्राइम ऑफिस स्पेस की जरूरत में करीब 26 फीसदी की गिरावट आई है। अधिकांश बड़े कॉरपोरेट खर्च बचाने के लिए अपने मौजूदा ऑफिस स्पेस का ही अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के हिसाब से विस्तार करा रहे हैं।
कमर्शियल रीयल एस्टेट फर्म सीबीआरई की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2012 में प्राइम ऑफिस स्पेस की कुल आवश्यकता 2.6 करोड़ वर्ग फुट दर्ज की गई, जबकि 2011 में यह जरूरत 3.5 करोड़ वर्ग फुट की रही थी। 2012 की अक्तूबर-दिसंबर अवधि में ऑफिस स्पेस की खपत करीब 70 लाख वर्ग फुट रही, जबकि इससे पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 60 लाख वर्ग फुट का था। लेनदेन की करीब 70 फीसदी गतिविधियां राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई और बंगलूरू में हुईं।
सीबीआरई के सीएमडी अंशुमान मैगजीन का कहना है कि ग्लोबल और घरेलू अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के चलते सभी प्रमुख शहरों में प्राइम ऑफिस स्पेस की खपत में कमी आई है। आर्थिक अनिश्चितता का कारोबारी विस्तार योजनाओं पर सीधा असर होता है। मांग को फिर से बहाल करने के लिए देश में आर्थिक सुधारों को तेजी से प्रभावी बनाने की जरूरत है। इसके अलावा, ग्लोबल अर्थव्यवस्था में भी कुछ सुधार दिखना आवश्यक है।