ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि भारत सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं बाहरी झटकों को सहने के लिए तो पर्याप्त सक्षम हैं, पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने पर इन्हें झटका लग सकता है।
मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सभी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए एक साझा चुनौती उस वक्त खड़ी होगी, जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरें बढ़ाना शुरू करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत के देशों में आम तौर पर वाह्य भुगतान स्थिति अच्छी है और सरकारी ऋण की स्थिति भी विश्व के अन्य क्षेत्रों के देशों के मुकाबले बेहतर है।
एजेंसी ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों में वाह्य झटकों से बचने की क्षमता अपेक्षाकृत अधिक है, लेकिन उनकी रेटिंग के परिदृश्य अलग-अलग हैं, क्योंकि उनमें से कुछ अर्थव्यवस्थाएं महत्वाकांक्षी सुधार की ओर बढ़ रही हैं, जबकि कई अर्थव्यवस्थाएं लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों से जूझ रही हैं। इन देशों की साख की गुणवत्ता सबसे प्रमुख रूप से इस बात पर निर्भर करती है कि सरकार नीतिगत प्रतिबद्धताओं पर खरी उतरती है या नहीं। एजेंसी ने कहा कि एशिया प्रशांत के ज्यादातर देश पेट्रोलियम आयातक हैं और हाल में कच्चे तेल में हालिया नरमी को इस क्षेत्र में सकारात्मक असर होगा। अनुमान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जून या सितंबर तक ब्याज दरें बढ़ाएगा। फेड के इस कदम से भारत समेत कई उभरते बाजारों से पूंजी की निकासी होने की आशंका है। मूडीज ने भारत को सकारात्मक परिदृश्य के साथ बीएए-3 की रेटिंग दे रखी है।
मूडीज ने कहा कि ऊर्जा लागत में बचत से विभिन्न देशों को अपने बजट घाटे पर नियंत्रण और राजकोषीय बफर तैयार करने में मदद मिलेगी। चीन के संबंध में एजेंसी ने कहा कि घटती विकास दर और ग्लोबल अर्थव्यवस्था में नरमी आने वाले दिनों में एशिया-प्रशांत के प्रदर्शन को प्रभावित करेगी। मूडीज ने कहा कि इस क्षेत्र के जिंस निर्यातक चीन की आर्थिक वृद्धि में नरमी के नए सामान्य स्तर को सबसे अधिक प्रभावित कर सकते हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आइएमएफ) ने अनुमान जताया है कि भारत 2015-16 में 7.5 फीसदी की वृद्धि दर के साथ चीन को पीछे छोड़ देगा। ऐसा सरकार के नीतिगत कदमों, निवेश में बढ़ोतरी और तेल की कीमतों में नरमी के चलते संभव हो पाएगा। इस क्षेत्र की कई अर्थव्यवस्थाओं में पारिवारिक कर्ज का स्तर ऊंचा रहेगा, लेकिन यह वित्तीय व्यवस्था की स्थिरता के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं है।
एजेंसी ने कहा हालांकि ऐसे कर्ज से निजी खपत में वृद्धि कम होगी, जिससे आर्थिक विस्तार सीमित हो सकता है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र के जिन देशों को मूडीज रेटिंग प्रदान करती है उनमें भारत (बीएए-3), कोरिया (एए-3), मलेशिया (ए-3), और पाकिस्तान (सीएए-1) को सकारात्मक रेटिंग परिदृश्य प्रदान किया है, जबकि मंगोलिया (बी-2) का परिदृश्य नकारात्मक है।