गिरते निर्यात और बढ़ते व्यापार घाटे से उबरने के लिए केंद्र सरकार निर्यातकों को और ज्यादा प्रोत्साहन देगी। निर्यातकों को मिलने वाली दो फीसदी की ब्याज छूट को एक साल के लिए बढ़ाते हुए सरकार ने इंजीनियरिंग के कई उपक्षेत्रों को भी इस योजना के दायरे में लाने का फैसला किया है। इसके अलावा निर्यात को प्रोत्साहन देने वाली कई योजनाओं को विस्तार देते हुए नए उत्पाद व देश इनमें शामिल किए गया हैं। इस साल निर्यात के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों को भी सरकार बढ़ावा देगी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने बताया कि छोटे और मझोले उद्योग के साथ-साथ हस्तशिल्प, हथकरघा, एग्री प्रोसेस फूड, खेल के सामान और रेडीमेट गारमेंट आदि क्षेत्रों के निर्यातकों के लिए चलाई जा रही दो फीसदी ब्याज छूट योजना को 31 मार्च, 2014 तक बढ़ाया गया है। विकसित देशों में मंदी के असर से बुरी तरह प्रभावित हुए इंजीनियरिंग निर्यात को संभालने के लिए इसके कुछ उप-क्षेत्रों को भी दो फीसदी ब्याज छूट के दायरे में लाने का फैसला किया है।
परियोजनाओं के निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए दो फीसदी ब्याज छूट की एक पायलट योजना भी शुरू की जा रही है। इसके तहत सार्क, अफ्रीका और म्यांमार में इफ्रास्ट्रक्चर से परियोजनाओं का प्रबंधन करने वाली कंपनियों को दो फीसदी ब्याज छूट मिलेगी। आगामी जनवरी से मार्च के दौरान बेहतर निर्यात करने वाले क्षेत्रों को भी सरकार प्रोत्साहन देगी।
शर्मा का कहना है कि इन उपायों के जरिए सरकार आखिरी तिमाही में निर्यात को बढ़ाकर व्यापार घाटे को काबू में करने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा सरकार ने फोकस मार्केट और फोकस प्रोडक्ट स्कीम जैसी पांच योजनाओं का विस्तार किया है। फोकस प्रोडक्ट स्कीम में 100 नए उत्पाद शामिल करते हुए ताइवान, थाईलैंड और चेक गणराज्य को इसमें शामिल किया गया है जबकि फोकस मार्केट स्कीम में पांच नए देश जोड़े गए हैं।
गिरते निर्यात पर चिंता जाहिर करते हुए आनंद शर्मा ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के दौरान देश का निर्यात 5.95 फीसदी गिर चुका है। इस साल जनवरी से नवंबर के दौरान देश का व्यापार घाटा बढ़कर 175 अरब डॉलर के ऊपर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल इस अवधि में यह करीब 147 अरब डॉलर था। उनका कहना है कि श्रम आधारित क्षेत्रों का निर्यात गिरने से उत्पादकता और रोजगार सृजन पर बुरा असर पड़ा है।
लेकिन निर्यात में गिरावट को वैश्विक मंदी के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए। उन्होंने माना कि चालू वित्त वर्ष में 360 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष अमन चड्ढा ने इंजीनियरिंग के कई क्षेत्रों को दो फीसदी ब्याज छूट दिए जाने का स्वागत करते हुए कहा है कि सस्ते ब्याज से निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी।