ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल मंगलवार को ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिसिएंशी द्वारा विकसित तीन एनर्जी एफिसिएंट इनीशिएटिव लांच करेंगे। इसमें हॉस्पिटल बिल्डिंग और डीजल जेनरेटर्स के लिए एनर्जी एफीशिएंसी और मल्टी स्टोरी रेजीडेंसियल बिल्डिंग के स्टार रेटिंग के लिए डिजाइन गाइडलाइंस शामिल है। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक एनर्जी एफिसिएंट मल्टी स्टोरी रेजीडेंसियल बिल्डिंग्स के लिए डिजाइन गाइडलाइंस में वैसी सभी जानकारियां दी गई हैं जिनमें बताया गया है कि एनर्जी एफिसिएंट मल्टी स्टोरी रेजीडेंसियल बिल्डिंग कैसे तैयार की जाए।
इस गाइडलाइंस को तैयार करते समय देश में जलवायु की विभिन्न स्थितियों को ध्यान में रखा गया है। मौजूदा गाइडलाइंस भारत के कंपोजिट और हाट-ड्राई जलवायु पर लागू है। गाइडलाइंस का इस्तेमाल एजेंसियों या शहरी इलाकों में मल्टी-स्टोरी रेजीडेंसियल बिल्डिंग्स के नियमन, डिजाइन या कंस्ट्रक्शन में शामिल व्यक्ति जैसे निजी या सरकारी क्षेत्र के डेवलपर्स या बिल्डर्स, आर्किटेक्ट और दूसरे पेशेवरों और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा किया जा सकता है। एक आकलन के मुताबिक इस गाइडलाइंस को अपना कर लगभग 50 फीसदी बिजली की बचत करना संभव है।
इसी तरह से कमर्शियल बिल्डिंगों की स्टार रेटिंग के लिए स्वैच्छिक स्कीम एनर्जी एफिसिएंट बिल्डिंग्स के लिए मार्केट पुल पैदा करने के मकसद से तैयार की गई है। मौजूदा समय में बिल्डिंग की तीन कैटेगरी डे यूज ऑफिस बिल्डिंग, शॉपिंग मॉल और बीपीओ के लिए स्कीम लागू है। रेटिंग प्लान इन सेक्टरों में बिल्डिंग की एनर्जी परफॉरमेंस इंडेक्स (इपीआई) के लिए वैंडविड्थ विकसित कर तैयार किया गया है। हॉस्पिटल बिल्डिंग के लिए स्टार रेटिंग स्कीम हॉस्पिटल बिल्डिंग में ऊर्जा की बचत को बढ़ावा देने के लिए विकसित की गई है।
हॉस्पिटल बिल्डिंग में जटिल और परिष्कृत इंजीनियरिंग सिस्टम होता है और इनका इस्तेमाल वर्ष भर 24 घंटे होने के कारण ऊर्जा की खपत ज्यादा होती है। ऐसे में हॉस्पिटल बिल्डिंग में ऊर्जा की खपत कम करने के लिए स्टार रेटिंग स्कीम विकसित की गई है। यह स्कीम परावर्तन और वितरण विश्लेषण का इस्तेमाल करते हुए स्टैटिस्टिकल मॉडल पर आधारित हॉस्पिटल बिल्डिंग के वास्तविक प्रदर्शन की रेटिंग करती है।
ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिसिएंशी ने पेट्रोलियम कंजरवेशन रिसर्च एसोसिएशन (पीसीआरए) के साथ मिल कर डीजल जेनरेटर्स सेट की स्टॉर लेबलिंग के लिए स्वैच्छिक आधार पर शेड्यूल विकसित किया है। एक आकलन के मुताबिक डीजी सेट मौजूदा औसत एफिसिएंशी 33.16 से 36.48 फीसदी एफिसिएंशी हासिल कर सकते हैं।
प्रस्तावित वालंट्री स्टैंडर्ड एंड लेबलिंग प्रोग्राम के तहत एक वर्ष में 12.88 हजार मीट्रिक टन (टीएमटी) ईंधन की खपत कम की जा सकती है और 79 करोड़ रुपये बचाए जा सकते हैं। 19 किलोवाट रेटिंग तक इंजन क्षमता वाले डीजल जेनरेटर सेट्स प्रोग्राम के पहले चरण में शामिल हैं। इसके लिए जरूरी है कि डीजल जेनरेटर सेट सरकार द्वारा तय की गई ताजा नियामकीय जरूरतों पर खरा उतरता हो।