ग्लोबल स्तर पर आर्थिक और वित्तीय अध्ययन करने एवं वित्तीय सेवाएं देने वाली फर्म क्रेडिट सुईस ने अपनी एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि देश में होने वाले लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद निवेश में एकदम से तेजी नहीं आएगी। आम चुनाव के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में जितनी तेजी की उम्मीद की जा रही है, उतनी दिखाई देना मुश्किल है।
रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव के नतीजों के बाद निवेश में एकदम से तेजी नहीं आएगी। निवेश और कारोबार से जुड़े हालात में सुधार आने में वक्त लगेगा। क्रडिट सुईस ने अपनी रिपोर्ट में इस धारणा से असहमति जताई है कि लोकसभा चुनाव के बाद नई सरकार बनने से देश में निवेश में तेजी आ जाएगी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि निवेश की चाल काफी हद तक देश में अटकी हुई परियोजनाओं से जुड़ी हुई है। इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अटकी परियोजनाओं को देखा जाए, तो इनमें से केवल एक चौथाई ही केंद्र सरकार की ओर से लंबित हैं। इनमें से भी तीन चौथाई परियोजनाएं बिजली और इस्पात क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं।
चुनाव बाद तीन संभावनाएं
यह दोनों ही क्षेत्र पहले ही काफी भारी उत्पादन क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में यह धारणा ठीक नहीं लगती है कि केंद्र में नई सरकार के आने से भारी संख्या में नई परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा और इनके लिए बड़ी मात्रा में निवेश आना शुरू हो जाएगा।
रिपोर्ट में चुनाव के बाद तीन तरह के राजनीतिक हालात सामने आने की संभावना जताई गई है। पहली संभावना के तहत नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दो या तीन सहयोगी दलों के साथ एनडीए की सरकार बन सकती है।
दूसरी संभावना के मुताबिक मोदी के नेतृत्व में पांच-छह सहयोगियों के साथ एनडीए की सरकार बन सकती है। इसके अलावा तीसरी संभावाना के तहत नरेंद्र मोदी से इतर किसी अन्य के नेतृत्व में आठ से दस सहयोगियों के साथ की एनडीए सरकार बनने के भी आसार हैं।
पर वक्त के साथ मिलेगा मुनाफा
इसमें पहली संभावना के सच होने पर, जिसकी चर्चा इस समय बाजार में सबसे ज्यादा है, निवेश और आर्थिक हालात में तेजी आती दिखना शुरू होने में कम से कम दो से तीन माह का समय लगेगा। इस तरह नई सरकार बनने का असर ठोस रूप से अगले वित्त वर्ष (2014-15) की पहली तिमाही में ही दिखाई देगा।
क्रेडिट सुईस ने कहा है कि भारतीय बाजार में मुनाफा कमाने के मौकों और रुपये में स्थिरता को लेकर उसकी सकारात्मक धारणा आने वाले समय के लिए भी बरकरार है। चुनाव के बाद हालात में स्पष्टता आने से इसमें और भी सुधार की उम्मीद है।
इससे भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े मुख्य कारकों में मजबूती आने से भारत के प्रति निवेशकों के रुझान में बढ़ोतरी होती दिखाई देगी। रिपोर्ट के मुताबिक मुद्रा विनिमय बाजार में रुपये की स्थिति अनुकूल होने और बड़े निवेश (होलसेल फंडिंग) की लागत में कमी आने से भारत में पूंजी के प्रवाह की गति बनी रहेगी।