सरकार के तमाम उपायों के बावजूद पेट्रोल और डीजल में मिलावट का धंधा उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक सक्रिय है। मिलावट के इसी धंधे की वजह से प्रदेश में 17 पेट्रोल पंपों को बंद किया जा चुका है। लेकिन स्थिति में अभी भी ज्यादा सुधार नहीं हो सका है। यहां ईंधन में मिलावट के कारण न केवल आम आदमी को मुसीबत झेलनी पड़ रही है, बल्कि सरकारी तेल कंपनियां भी दबाव में है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक ईंधन में मिलावट के संदेह पर देश भर से पेट्रोल और डीजल के 2,66,545 नमूनों को पिछले दो वित्त वर्ष और चालू वित्त वर्ष के पहले नौ माह में एकत्रित किया गया था। इसमें से 38,872 नमूने केवल उत्तर प्रदेश से लिये गए।
जांच में उत्तर प्रदेश से एकत्रित किये गए नमूनों में सर्वाधिक मिलावट का मामला उजागर हुआ है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि मिलावट साबित हो जाने पर राज्य के 17 खुदरा बिक्री केंद्रों को बंद किया जा चुका है। जबकि देशभर में कुल 57 पेट्रोल पंप इस बाबत बंद किये गए हैं।
इनमें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के सर्वाधिक 30 पेट्रोल पंप शामिल हैं। इस बारे में इंडियन ऑयल के अधिकारी का कहना है कि ईंधन में मिलावट का मामला साबित हो जाने पर भारी भरकम जुर्माने के साथ डीलर की डिस्ट्रीब्यूटरशिप खत्म करने का प्रावधान भी है।
कंपनी मिलावट के धंधे पर लगाम कसने के लिए तकनीकी उपकरणों की सहायता ले रही है। इसके जरिए ईंधन को डिपो से ले जाने वक्त ट्रकों पर निगरानी रखा जाता है। इसके बावजूद मिलावटखोर ईंधन में मिलावट करने में सफल हो रहे हैं। इसलिए तेल कंपनियों ने नए सिरे से मिलावट पर अंकुश लगाने संबंधी योजना बनाने का फैसला किया है। ताकि किसी भी हाल में मिलावटखोरों को कामयाबी नहीं मिल सके।